Wednesday, October 28, 2026

सिकिदिरी हाइडल प्रोजेक्ट मामले में पूर्व JSEB अध्यक्ष की याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

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28 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

Ranchi News: झारखंड के चर्चित सिकिदिरी हाइडल प्रोजेक्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य बिजली बोर्ड (JSEB) के तत्कालीन अध्यक्ष शिवेंद्र नाथ वर्मा की याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। वर्मा ने सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।

हाईकोर्ट में दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अधिवक्ता दीपक भारती ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ता शिवेंद्र नाथ वर्मा की ओर से अधिवक्ता हिमांशु शेखर ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।

इस याचिका का संबंध उस आपराधिक मामले से है, जिसमें सिकिदिरी स्थित स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना में मरम्मत कार्य के आवंटन और भुगतान को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

क्या है सिकिदिरी हाइडल प्रोजेक्ट का मामला?

सिकिदिरी में स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना के तहत 65-65 मेगावाट क्षमता वाले दो पावर हाउस स्थापित किए गए थे। इन इकाइयों को भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने क्रमशः 1977 और 1980 में स्थापित किया था। BHEL इन संयंत्रों की मूल उपकरण निर्माता कंपनी (OEM) है।

सीबीआई के आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में परियोजना के मरम्मत कार्य को लेकर JSEB के कुछ अधिकारियों, BHEL और NPEL से जुड़े लोगों के बीच कथित आपराधिक साजिश हुई। जांच एजेंसी का दावा है कि करीब 2.5 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च वाले कार्य को नियमों की अनदेखी करते हुए 20.87 करोड़ रुपये में BHEL को आवंटित किया गया।

पूर्व अध्यक्ष पर क्या हैं आरोप?

मामले में शिवेंद्र नाथ वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने मरम्मत कार्य की दरों की तर्कसंगतता की पर्याप्त जांच किए बिना अधिक राशि पर मंजूरी दी। रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड के अन्य इंजीनियरों ने इस कार्य का अनुमानित खर्च 4.88 करोड़ रुपये बताया था, लेकिन इस अनुमान को नजरअंदाज किए जाने का आरोप है।

इसके अलावा, वर्मा पर बिना बैंक गारंटी के 20 प्रतिशत अग्रिम भुगतान की अनुमति देने का भी आरोप लगाया गया है। सीबीआई के अनुसार, इन फैसलों के कारण सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।

हालांकि, ये आरोप जांच एजेंसी के मामले का हिस्सा हैं। हाईकोर्ट में याचिका पर अंतिम फैसला अभी सुनाया जाना बाकी है। इसलिए आरोपों को अदालत द्वारा प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अब हाईकोर्ट के फैसले पर नजर

शिवेंद्र नाथ वर्मा ने सीबीआई की विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।

अब अदालत के अंतिम आदेश से स्पष्ट होगा कि याचिकाकर्ता को इस स्तर पर राहत मिलती है या मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।

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