जमशेदपुर: डीबीएमएस हाई स्कूल के कलाकृति प्रेक्षागृह में रविवार को ‘शिक्षकों का सम्मान, शिक्षक का उत्थान’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने झारखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत किए बिना नई शिक्षा नीति के बेहतर परिणाम पर सवाल खड़े किए।
60 प्रतिशत प्राथमिक स्कूलों के पास अपनी जमीन नहीं : सरयू राय
सरयू राय ने कार्यक्रम में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य के करीब 60 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों के पास अपनी जमीन नहीं है। उनके अनुसार 21 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर, 41 प्रतिशत में पुस्तकालय, 33 प्रतिशत में बाउंड्री और 75 प्रतिशत स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि कई विद्यालयों में शौचालय और बेंच-डेस्क जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है। सरयू राय के मुताबिक, स्कूलों की आधारभूत व्यवस्था मजबूत किए बिना शिक्षा के स्तर में अपेक्षित बदलाव लाना मुश्किल होगा।
शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक काम में लगाने पर सवाल
विधायक ने शिक्षकों की कमी के बीच उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई शिक्षकों को जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग के कार्यालयों में प्रतिनियुक्त किया जाता है।
सरयू राय ने कहा कि शिक्षक का प्राथमिक दायित्व बच्चों को पढ़ाना है। यदि उन्हें दूसरे सरकारी कार्यों में लगाया जाएगा तो इसका असर सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
उन्होंने प्राथमिक स्तर की शिक्षा को मजबूत करने और स्कूलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देने की बात कही।
कुलपतियों ने भी शिक्षा में बदलाव की जरूरत बताई
कार्यक्रम में कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता ने शिक्षा को देश के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने शिक्षकों से एआई, मशीन लर्निंग और नई तकनीकों की जानकारी हासिल करने की अपील की। साथ ही उन्होंने शिक्षक और विद्यार्थी के बीच प्रत्यक्ष संवाद को जरूरी बताया।
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार सिंह ने गुरु-शिष्य संवाद में कमी को लेकर चिंता जताई और स्कूल शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधर ने एडवांस लेबोरेटरी कार्यक्रमों और शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता बताई। सोनादेवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने शिक्षा को विद्यार्थी केंद्रित बनाने पर जोर दिया।
शिक्षकों की कमी और वेतन का मुद्दा भी उठा
विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा ने शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं और समय पर वेतन भुगतान जैसे विषयों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए समय पर वेतन उपलब्ध कराने की जरूरत बताई।
वहीं, रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों में डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर जोर दिया।
24 जिलों में शिक्षक सम्मान समारोह कराने की घोषणा
युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने कहा कि शिक्षक सम्मान कार्यक्रम को जमशेदपुर तक सीमित न रखकर राज्य के सभी 24 जिलों में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को समझकर संबंधित मुद्दों को सरकार के सामने रखने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में शिक्षा से जुड़े विषयों पर तीन तकनीकी सत्र भी हुए। इनमें प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा छात्र-युवा असंतोष जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
शिक्षा नियमावली बनाने की मांग
समापन सत्र में सरयू राय ने शिक्षा नियमावली नहीं बनने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नियमावली के अभाव में आवश्यकता आधारित शिक्षकों के बीच नौकरी को लेकर असुरक्षा बनी रहती है। उन्होंने सरकार से शिक्षा नियमावली तैयार करने की मांग की।
नदी में डूबी युवती को बचाने वाले जामू शेख सम्मानित
कार्यक्रम से पहले सरयू राय ने जीतिया पर्व के दौरान स्वर्णरेखा नदी में हुए हादसे में एक युवती को बचाने वाले जामू शेख को सम्मानित किया। उनके साथ हादसे के बाद लोगों से फोन के माध्यम से मदद की अपील करने वाले शुभम को भी सम्मान दिया गया। दोनों के सम्मान के दौरान सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।
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