Sunday, June 21, 2026

सरकार ने 2025-26 के लिए कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड (EPF) जमा पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी दे दी है.

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने 2025-26 के लिए कर्मचारियों के भविष्य निधि (EPF) जमा पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूर प्रदान कर दी ही. इस राशि को इस महीने ही सात करोड़ से अधिक अंशधारक सदस्यों के खातों में जमा किए जाने की संभावना है.

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा तय की गई ब्याज की दर को वित्त मंत्रालय के जरिए से सरकार की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाता है. हालांकि वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा निर्धारित 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को अपनी स्वीकृति दे दी है.

बता दें कि इससे पहले दो मार्च, 2026 को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई सीबीटी की बैठक हुई थी. इसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज दर तय की गई थी. यह लगातार तीसरा साल है जब यह दर बरकरार रखी गई है.

इसके बाद यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा गया था, क्योंकि ईपीएफ का ‘गारंटर’ केंद्र सरकार होती है. बताया जाता है कि वित्त मंत्रालय ने जांच के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है. इस वजह से श्रम मंत्रालय के निर्देश पर ईपीएफओ इसी महीने 2025-26 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज राशि अंशधारकों के खातों में जमा कर सकता है.

ब्याज अंशधारकों के खातों में जमा होगा
इतना ही नहीं ईपीएफओ द्वारा विकसित नए तंत्र के तहत अब ब्याज सीधे और शीघ्रता से अंशधारकों के खातों में जमा किया जाएगा. वहीं पिछले वर्ष फरवरी में ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भी 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को बरकरार रखा था. हालांकि ईपीएफओ ने 2024 में 2023-24 के लिए ब्याज दर को थोड़ा बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत किया था, जो 2022-23 में 8.15 प्रतिशत थी.

इसी प्रकार मार्च 2022 में संगठन ने 2021-22 के लिए ब्याज दर घटाकर 8.10 प्रतिशत कर दी थी, जो चार दशक से अधिक का निचले स्तर पर थी. इससे पहले 2020-21 में यह दर 8.5 प्रतिशत थी. वहीं वित्त वर्ष 1977-78 में यह आठ प्रतिशत थी. मार्च 2020 में ईपीएफओ ने 2019-20 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दी थी, जो 2018-19 में 8.65 प्रतिशत थी.

संगठन ने 2016-17 में 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत ब्याज दर दी थी, जबकि 2015-16 में यह दर 8.8 प्रतिशत थी. वित्त वर्ष 2013-14 और 2014-15 में ब्याज दर 8.75 प्रतिशत रही, जो 2012-13 के 8.5 प्रतिशत से अधिक थी. वित्त वर्ष 2011-12 में यह दर 8.25 प्रतिशत थी.

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