Sunday, June 21, 2026

झारखंड में आम महोत्सव का समापन हो गया है, तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में आम की अच्छी बिक्री हुई है.

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रांची:झारखंड के आदिवासी किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए नाबार्ड द्वारा रांची में आयोजित तीन दिवसीय “आम महोत्सव-2026” का आज रविवार को समापन हो गया. 19 जून से 21 जून तक रांची के शहीद चौक स्थित सहकारी बैंक परिसर में आयोजित आम महोत्सव इस लिहाज से काफी सफल माना जा रहा है कि तीन दिन की बेहद अल्प अवधि में राजधानीवासियों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहा.

नाबार्ड की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार तीन दिनों तक चले इस आम महोत्सव में 100 टन से अधिक आमों की बिक्री हुई, जबकि कुल कारोबार 60 लाख रुपये से अधिक का हुआ.ऑर्गेनिक और केमिकलमुक्त आम के प्रति राजधानी वासियों का आकर्षण और हर दिन मेले में उमड़ी ग्राहकों की भारी भीड़ इस ओर इशारा करती है कि जनता अब अपने स्वास्थ्य के प्रति पहले की तुलना में काफी सजग हुई है और वह प्राकृतिक और गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादों का ही इस्तेमाल करना चाहती है.

अच्छी बिक्री से किसान उत्साहित

19 से 21 जून तक आयोजित आम महोत्सव में राज्य के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों और किसान समूहों ने भाग लिया. आम महोत्सव में दशहरी, मालदा, मल्लिका, लंगड़ा, गुलाबखास, नीलम, आम्रपाली और हिमसागर जैसी लोकप्रिय किस्मों के आम उपलब्ध कराए गए. आमों की गुणवत्ता, स्वाद और ताजगी ने उपभोक्ताओं को इतना आकर्षित किया कि बड़ी संख्या में ग्राहकों ने दोबारा खरीदारी की और संस्थागत तथा व्यावसायिक उपयोग के लिए थोक ऑर्डर भी दिए. उपभोक्ताओं की मांग से महोत्सव में आए आम उत्पादक किसान भी काफी उत्साहित दिखे. हजारीबाग की सपोर्ट संस्था से जुड़े विनय कुंवर और गुमला से आए युवा आम उत्पादक किसान चंदन कुमार कहते हैं कि बिल्कुल ऑर्गेनिक तरीके से उत्पादित आम स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है.

केमिकल फ्री आम के प्रति लोगों का बढ़ा रुझान

तीन दिवसीय झारखंड आम महोत्सव में खरीदारी करने आए प्रोफेसर हरमिंदर वीर सिंह ने इस तरह के आयोजन पर खुशी जताते हुए कहा कि इस तरह का महोत्सव या मेला बार-बार लगना चाहिए. यहां रसायन और कार्बाइड मुक्त आम की खरीदारी करने का मौका मिलता है तो ऑर्गेनिक ढंग से उगायी हल्दी और अन्य शुद्ध मसाले भी बिक रहे हैं. हरमिंदर वीर सिंह ने कहा कि उन्होंने मसाले और मालदह, हिमसागर एवं अन्य आम की खरीदारी की है.

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आम और अमरूद के पौधे भी खूब बिके महोत्सव में

रांची में नाबार्ड के सौजन्य से आयोजित तीन दिवसीय आम महोत्सव में वैसे लोग भी खूब पहुंचे जो अपने बाड़ी में बढ़िया प्रजाति के आम के पौधे लगाना चाहते हैं. महोत्सव में पूरी तरह विश्वसनीय आम और पिंक ताइवान वैरायटी के अमरूद के पौधों की भी काफी बिक्री हुई. कांके सुकुरहुटू से आम महोत्सव में आए राजीव रंजन महतो ने यहां से लंगड़ा मालदह आम का पौधा खरीदा है. उन्होंने बताया कि उनके बगीचे में कई देहाती आम के पेड़ हैं, लेकिन वह इस बार लंगड़ा का पौधा 120 रुपये में खरीद कर ले जा रहे हैं.

किसानों को अपने उत्पाद का मिला लाभकारी मूल्य

आम महोत्सव की समाप्ति पर नाबार्ड की ओर से दी गई जानकारी में यह बताया गया कि महोत्सव के दौरान ऑर्गेनिक और रसायन मुक्तआमों की औसत कीमत 55 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम रही. जिससे किसानों को लाभकारी मूल्य प्राप्त हुआ. उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग के कारण कई एफपीओ और किसान समूहों को अतिरिक्त आमों की व्यवस्था भी करनी पड़ी.

कृषि उत्पाद उच्च गुणवत्ता के मानकों पर खरे उतरेः दीपमाला

नाबार्ड झारखंड की मुख्य महाप्रबंधक दीपमाला घोष ने कहा कि इस आयोजन ने झारखंड के आदिवासी किसानों द्वारा उत्पादित आमों की बड़ी बाजार क्षमता को उजागर किया है. उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की मजबूत मांग और बार-बार खरीदारी यह दर्शाती है कि नाबार्ड समर्थित हस्तक्षेपों के तहत तैयार कृषि उत्पाद उच्च गुणवत्ता के मानकों पर खरे उतर रहे हैं.

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किसानों को मिला उत्पाद का बेहतर मूल्य

वहीं सरायकेला-खरसावां के किसान सोना राम सोरेन ने कहा कि ऐसे आयोजनों से किसानों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने और बेहतर मूल्य प्राप्त करने का मौका मिलता है. वहीं लातेहार के किसान रामेश्वर उरांव ने कहा कि इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बाजार आधारित खेती के लिए प्रोत्साहन मिलता है.

नाबार्ड का यह आयोजन सिर्फ आमों की बिक्री तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संवाद और भरोसे का पुल भी तैयार किया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संग्रहण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात की दिशा में प्रयास तेज किए जाएं तो झारखंड के आदिवासी किसानों के उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भी पहुंच सकते हैं.

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