Monday, November 2, 2026

सम्मेद शिखर की धार्मिक पवित्रता और प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा की मांग, जैन महासभा ने राज्यपाल से की पहल की अपील

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Ranchi News | 2 नवंबर 2026: झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित जैन धर्म के पवित्र तीर्थ सम्मेद शिखरजी की धार्मिक गरिमा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को लोक भवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर इस तीर्थ की पवित्रता और प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की। इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा।

सम्मेद शिखर जैन समाज की गहरी आस्था का केंद्र

महासभा ने ज्ञापन में कहा कि सम्मेद शिखर जैन धर्म का सर्वोच्च तीर्थ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, 24 तीर्थंकरों में से 20 ने इसी पवित्र पर्वतराज पर मोक्ष प्राप्त किया था। यही कारण है कि यह स्थल देश-विदेश के करोड़ों जैन श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि तीर्थ की धार्मिक पहचान और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए इसकी गरिमा बनाए रखने के लिए प्रभावी पहल की जाए।

सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

महासभा ने सम्मेद शिखर और आसपास के तीर्थ क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही, प्रवेश मार्गों पर उचित जांच और निगरानी की व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया, ताकि तीर्थ क्षेत्र की सुरक्षा बनी रहे और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

श्रद्धालुओं को मिलें जरूरी सुविधाएं

प्रतिनिधिमंडल ने तीर्थयात्रियों की सुविधा को भी महत्वपूर्ण बताया। महासभा की ओर से स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सहायता और आवागमन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई।

राज्यपाल से आग्रह किया गया कि वे राज्य सरकार और संबंधित प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की पहल करें। इससे देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालु सुरक्षित माहौल में धार्मिक यात्रा पूरी कर सकेंगे।

पर्यटन विकास और धार्मिक पवित्रता को लेकर चिंता

सम्मेद शिखरजी यानी पारसनाथ पहाड़ी को लेकर पहले भी पर्यटन और इको-टूरिज्म से संबंधित प्रस्तावों पर जैन समाज ने चिंता जताई है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना रहा है कि इस क्षेत्र को सामान्य पर्यटन स्थल की तरह विकसित करने के बजाय इसकी विशिष्ट धार्मिक पहचान और परंपराओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

जैन समुदाय को आशंका रही है कि अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों से तीर्थ की पवित्रता, शांत वातावरण और प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से तीर्थ क्षेत्र में गतिविधियों के नियमन, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की मांग लगातार उठती रही है।

धार्मिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के माध्यम से महासभा ने सम्मेद शिखर की धार्मिक महत्ता के साथ-साथ उसके प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया है। महासभा की मांग है कि तीर्थ क्षेत्र में सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि इसकी आध्यात्मिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रह सके।

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