मुंबई, 12 अक्टूबर 2026। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली। पिछले कारोबारी सत्र की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली और बिकवाली का दबाव बढ़ गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और सरकारी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। इसके चलते बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 547.65 अंक गिरकर 71,924.68 पर, जबकि निफ्टी 157.10 अंक टूटकर 22,363.35 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स में एक समय 796 अंक से अधिक की गिरावट भी दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी का कैसा रहा प्रदर्शन?
सोमवार के कारोबारी सत्र में बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी देखने को मिली।
| प्रमुख सूचकांक | गिरावट | प्रतिशत में गिरावट | बंद स्तर |
|---|---|---|---|
| BSE सेंसेक्स | 547.65 अंक | 0.76% | 71,924.68 |
| NSE निफ्टी 50 | 157.10 अंक | 0.70% | 22,363.35 |
बाजार में गिरावट से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी। कारोबारी सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा और अंत में दोनों सूचकांक लाल निशान पर बंद हुए।
इन बड़े शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
सोमवार को सेंसेक्स में शामिल कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, एफएमसीजी और आईटी क्षेत्र के शेयरों पर विशेष दबाव रहा।
गिरावट वाले प्रमुख शेयर
- आईटीसी (ITC)
- टेक महिंद्रा
- हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL)
- लार्सन एंड टुब्रो (L&T)
- भारतीय स्टेट बैंक (SBI)
- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
इन शेयरों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को बढ़ाने में योगदान दिया।
गिरते बाजार में भी इन शेयरों में मजबूती
बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद कुछ प्रमुख शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें शामिल रहे:
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL)
- महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M)
- कोटक महिंद्रा बैंक
- एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Tech)
हालांकि, इन कंपनियों के शेयरों में बढ़त के बावजूद बाजार की कुल धारणा कमजोर बनी रही।
शेयर बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के वायदा भाव में 1.14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कीमत लगभग 105.80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों में महंगाई और आयात बिल बढ़ने की चिंता गहरा सकती है।
इसका असर कंपनियों की लागत, परिवहन खर्च और उपभोक्ता मांग पर पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे माहौल में निवेशक शेयरों को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं।
2. सरकारी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका में 10 साल की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल बढ़कर तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने पर निवेशकों के लिए निश्चित आय वाले विकल्प अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं। इससे शेयर बाजार में निवेश के प्रति उत्साह प्रभावित होने की संभावना रहती है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव बाजार की व्यापक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
3. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली को भी बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह बताया गया है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार से 3,568.90 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली से बाजार में उपलब्ध मांग पर दबाव पड़ सकता है और प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी बढ़ सकती है।
एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख
सोमवार को एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी एक समान तेजी नहीं रही। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का शंघाई कंपोजिट गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग में मामूली बढ़त दर्ज की गई।
वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतें, बॉन्ड प्रतिफल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की चाल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
सोमवार की गिरावट से बाजार में अनिश्चितता और सतर्कता का संकेत मिलता है। हालांकि, एक कारोबारी सत्र की गिरावट के आधार पर बाजार की अगली दिशा तय करना उचित नहीं होगा। निवेशकों को कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अपने निवेश उद्देश्यों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
नोट: बाजार के आंकड़े उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट पर आधारित हैं। निवेश से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक बाजार आंकड़ों और योग्य वित्तीय सलाहकार की राय पर विचार करें। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।
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