पटना, 12 अक्टूबर 2026। बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार, 13 अक्टूबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में मार्च निकालने की घोषणा की गई है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग उठाई जाएगी।
भाकपा-माले के विधायक संदीप सौरभ और छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) से जुड़े नेताओं के मुताबिक, मार्च गांधी मैदान से शुरू होकर राजभवन तक जाएगा। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की भी योजना है।
13 अक्टूबर को कहां से कहां तक निकलेगा मार्च?
आयोजकों की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार, पटना में मार्च गांधी मैदान से शुरू होगा और राजभवन तक पहुंचेगा। आंदोलन में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे।
आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। हालांकि, मार्च के लिए प्रशासन की ओर से जारी विस्तृत मार्ग, यातायात संबंधी निर्देश और सुरक्षा व्यवस्था की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है। इसलिए निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन की ताजा सूचना देखना उचित होगा।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों?
भाकपा-माले विधायक संदीप सौरभ ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में भी पक्षपात हुआ।
संदीप सौरभ ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की वेबसाइट और सॉफ्टवेयर से जुड़ी प्रक्रिया के केंद्रीकरण के कारण स्थानीय अधिकारियों की भूमिका सीमित हो गई है।
उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई करने और उनके इस्तीफे की मांग की है। ये आरोप विपक्षी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं की गई है।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को रोके जाने पर भी उठाए सवाल
संदीप सौरभ ने दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रहे लोगों को कथित तौर पर रोके जाने और हिरासत में लिए जाने की घटनाओं पर भी आपत्ति जताई।
उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे लोगों के साथ बातचीत की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना उनके विरोध के अधिकार को प्रभावित करता है।
इसी मुद्दे को लेकर पटना में मार्च निकालने की घोषणा की गई है। आयोजकों के मुताबिक, इसके माध्यम से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित सवालों पर जवाबदेही की मांग की जाएगी।
आइसा ने बिहार में एसआईआर की जांच की मांग उठाई
छात्र संगठन आइसा भी प्रस्तावित मार्च में शामिल होने की बात कह रहा है। संगठन की राज्य उपाध्यक्ष सवा ने कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया लागू होने के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठे हैं।
उन्होंने दावा किया कि संगठन की जांच में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें जीवित लोगों के नाम कथित तौर पर मृतकों की सूची में दर्ज कर दिए गए। उनका आरोप है कि ऐसी गड़बड़ियों के कारण कुछ लोग मतदान के अधिकार से वंचित रह गए।
आइसा की ओर से मांग की गई है कि मतदाता सूची की निष्पक्ष जांच हो और कथित अनियमितताओं की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष जरूरी होंगे।
राजभवन मार्च के बाद राज्यपाल को सौंपा जाएगा ज्ञापन
आयोजकों के मुताबिक, गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च निकालने के बाद राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें कई प्रमुख मांगें शामिल होंगी।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
- एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग।
- मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच।
- बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की जांच।
- कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई।
आयोजकों का कहना है कि ज्ञापन के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार तक मतदाता सूची तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे पहुंचाए जाएंगे।
आंदोलन को दूसरे राज्यों तक ले जाने की तैयारी
आइसा की राज्य उपाध्यक्ष सवा के मुताबिक, यह आंदोलन केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन इसे दूसरे राज्यों में भी आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने छात्रों, वकीलों, नागरिक समाज के सदस्यों और आम लोगों से मतदाता सूची की पारदर्शिता के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने की अपील की।
आयोजकों ने दावा किया है कि प्रशासन को मार्च के संबंध में सूचना दी गई है और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा।
मार्च को लेकर प्रशासन की व्यवस्था पर रहेगी नजर
पटना में 13 अक्टूबर को प्रस्तावित इस मार्च के दौरान यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम महत्वपूर्ण रहेंगे। गांधी मैदान से राजभवन तक जाने वाले मार्ग पर लोगों को संभावित भीड़ या यातायात में बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
हालांकि, मार्च के लिए किसी विशिष्ट सड़क को बंद करने या यातायात का मार्ग बदलने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के आधार पर ही अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
क्या है पूरे आंदोलन का मुख्य मुद्दा?
इस आंदोलन का केंद्र मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर उठे सवाल और चुनाव आयोग की जवाबदेही है। विपक्षी नेताओं और छात्र संगठन ने इन मुद्दों पर जांच तथा कार्रवाई की मांग की है।
अब सबकी नजर 13 अक्टूबर को पटना में होने वाले मार्च पर है। मार्च में कितने लोग शामिल होते हैं, प्रशासन की क्या व्यवस्था रहती है और ज्ञापन पर आगे क्या कार्रवाई होती है—इन बातों से आंदोलन की अगली दिशा तय हो सकती है।
BHARAT SUPERFAST NEWS
