भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेज गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच सेंसेक्स करीब 730 अंक और निफ्टी 231 अंक से अधिक फिसल गया।
सुबह के कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 730 अंक गिरकर 73,170.12 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 231.50 अंक टूटकर 22,908.95 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स में शामिल सभी 30 शेयर शुरुआती कारोबार में लाल निशान में रहे।
इन बड़े शेयरों में रही सबसे ज्यादा गिरावट
शुरुआती कारोबार में बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत बनी चिंता
वैश्विक तेल बाजार में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.27 प्रतिशत बढ़कर 106.7 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में क्रूड महंगा होने से आयात लागत और कंपनियों के खर्च पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता
Enrich Money के सीईओ पोनमुडी आर. के. के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा जलडमरूमध्य को लेकर बनी स्थिति ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। निवेशकों को आशंका है कि तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बनाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रही। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3,693.93 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे थे।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी
भारतीय बाजार पर अन्य एशियाई बाजारों की कमजोर शुरुआत का भी असर पड़ा। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और चीन का शंघाई कंपोजिट शुरुआती कारोबार में दबाव में रहे, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा।
बाजार में अस्थिरता बने रहने की आशंका
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव से जुड़ी परिस्थितियों में बदलाव आने तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए बाजार की स्थिति और कंपनियों के बुनियादी वित्तीय संकेतकों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।
