पटना, 29 अक्टूबर 2026: बिहार में शिक्षकों के वेतन भुगतान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच तेज कर दी है। विभागीय आंतरिक ऑडिट में पटना, नवादा और भागलपुर से जुड़े मामलों में करीब 1.85 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान की जानकारी मिली है। अब राज्य के सभी 38 जिलों में वेतन भुगतान की जांच कराई जा रही है।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अधिकारियों को नवंबर के मध्य तक ऑडिट पूरा करने का निर्देश दिया है। जांच का मुख्य केंद्र मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) पोर्टल के माध्यम से हुए भुगतान, वेतन रिकॉर्ड में कथित बदलाव और लॉगिन आईडी के संभावित दुरुपयोग पर है।
नवंबर के मध्य तक पूरी होगी जांच
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, शुरुआती जांच में कई गंभीर मामले सामने आए हैं। विभाग वेतन भुगतान की ऑनलाइन व्यवस्था में संभावित खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करने की दिशा में काम कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि HRMS पोर्टल में कथित हेराफेरी रोकने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनियमितताओं में संलिप्त पाए जाने वाले शिक्षकों और अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
भागलपुर में काल्पनिक शिक्षकों के नाम पर भुगतान का आरोप
भागलपुर जिले में HRMS पोर्टल के माध्यम से कथित अनधिकृत भुगतान के दो मामले सामने आए हैं। इनमें काल्पनिक शिक्षकों के नाम पर सरकारी राशि जारी किए जाने का आरोप है।
विभागीय आदेश के मुताबिक, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी शशि चंदन चौधरी के खिलाफ 8 अक्टूबर 2026 को जोगसर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप है कि पोर्टल के जरिए एक काल्पनिक शिक्षक के नाम पर भुगतान किया गया। मामले में अगले दिन उनकी गिरफ्तारी की जानकारी भी दी गई है।
दूसरे मामले में तनुश्री नाम की कथित काल्पनिक शिक्षिका के नाम पर कई महीनों तक भुगतान किए जाने का आरोप है। इस मामले में 98,12,773 रुपये की अनियमितता का उल्लेख किया गया है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायत और आगे की जांच के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
नवादा में वेतन से अधिक राशि भुगतान करने का मामला
नवादा जिले में एक शिक्षिका के वेतन और भत्तों से जुड़े रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, रजौली के बेलाडीह स्थित प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका के भुगतान में अनधिकृत बदलाव किए गए।
प्राथमिकी में बताया गया है कि अप्रैल 2025 में शिक्षिका का स्वीकृत मासिक वेतन 46,772 रुपये था। आरोप है कि पोर्टल पर अतिरिक्त भत्ते जोड़कर भुगतान की राशि बढ़ा दी गई। इसी तरह मई 2025 में भी स्वीकृत वेतन से अलग भुगतान किए जाने का आरोप है।
जांच में शिक्षिका के खाते में समग्र शिक्षा निधि से 2.86 लाख रुपये भेजे जाने का भी उल्लेख है। शिकायत के अनुसार, शिक्षिका को कुल 10,43,950 रुपये का कथित अनधिकृत भुगतान हुआ।
मामले में पोर्टल पर मेकर और चेकर की भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है। बैंक खाते से एक लाख रुपये दूसरे व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, संबंधित व्यक्ति की भूमिका और लेनदेन के कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पटना में मेकर लॉगिन आईडी के दुरुपयोग का आरोप
पटना में भी सरकारी राशि के भुगतान में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने 14 अक्टूबर 2026 को गुलजारबाग स्थित एफएनएस अकादमी के लिपिक विजय कुमार विद्यार्थी को निलंबित किया था।
निलंबन आदेश के अनुसार, उन पर सरकारी और विभागीय निधि से संबंधित 76,71,983 रुपये की वित्तीय अनियमितता में शामिल होने का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी की आधिकारिक मेकर लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर HRMS पोर्टल पर अनधिकृत प्रविष्टियां कीं और निर्धारित राशि से अधिक भुगतान तैयार किया।
इस मामले में विभागीय जांच और आरोपपत्र तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। संबंधित आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।
HRMS भुगतान प्रणाली की निगरानी बढ़ाने की तैयारी
पटना, नवादा और भागलपुर के मामलों ने शिक्षकों के वेतन भुगतान की ऑनलाइन व्यवस्था में निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विभाग अब राज्यव्यापी ऑडिट के जरिए संदिग्ध लेनदेन की पहचान करने और जिम्मेदार लोगों की भूमिका निर्धारित करने में जुटा है।
सभी 38 जिलों में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कुल कितनी राशि का भुगतान अनियमित तरीके से हुआ और किन स्तरों पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई। फिलहाल, संबंधित मामलों में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं।
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