Thursday, April 23, 2026

विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक दबाव से सेंसेक्स 671 अंक गिरा, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट रही, जबकि फार्मा में बढ़त.

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मुंबई: भारतीय इक्विटी बाजारों के लिए गुरुवार की सुबह भारी निराशा लेकर आई. पिछले कुछ सत्रों में दिखी तेजी पर ब्रेक लगाते हुए बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक—सेंसेक्स और निफ्टी—भारी गिरावट के साथ खुले. बाजार में आई इस गिरावट ने निवेशकों के मन में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर कमजोर संकेत और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI/FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली है.

बाजार का ताजा हाल
गुरुवार सुबह 9:25 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 671 अंक या 0.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,845 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया. इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 179 अंक या 0.74 प्रतिशत फिसलकर 24,198 के करीब पहुंच गया. बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी सुस्ती रही, हालांकि वे मुख्य सूचकांकों की तुलना में थोड़े कम गिरे. निफ्टी मिडकैप 100 में 0.34 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 में 0.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

सेक्टोरल अपडेट: कौन गिरा, कौन संभला?
आज के कारोबार में लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड कर रहे हैं. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.61%) और ऑटो (1.03%) में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी जा रही है. बैंकिंग और आईटी सेक्टर, जो बाजार की दिशा तय करते हैं, वे भी आज दबाव में हैं. हालांकि, संकट के इस समय में फार्मा (0.71% बढ़त) और ऑयल एंड गैस सेक्टर में मामूली हरियाली देखी गई, क्योंकि निवेशक इन्हें ‘सेफ हेवन’ मानकर निवेश कर रहे हैं.

गिरावट के पीछे के बड़े कारण
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं. सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी है. बीते सत्र (22 अप्रैल) में FII ने भारतीय बाजार से 2,078 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. चिंता की बात यह रही कि इस बार घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी सहारा नहीं दिया और उन्होंने भी 1,078 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की.

दूसरा प्रमुख कारण एशियाई बाजारों का कमजोर प्रदर्शन है. जापान का निक्केई 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरा, जबकि चीन और हांगकांग के बाजारों में भी 1.5 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई.

वैश्विक भू-राजनीति और ट्रंप का बयान
भले ही अमेरिकी बाजार रात को बढ़त के साथ बंद हुए थे, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों को डरा रखा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ ‘संघर्ष विराम’ (Ceasefire) को आगे बढ़ाने की बात कही है, क्योंकि उनके अनुसार तेहरान की सरकार अंदरूनी तौर पर काफी कमजोर हो चुकी है. हालांकि, अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी अभी भी जारी है, जिससे तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,100–24,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट ज़ोन है. अगर बाजार इस स्तर को तोड़ता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है. वहीं, ऊपर की ओर 24,400–24,500 के स्तर पर भारी रेजिस्टेंस (रुकावट) देखा जा रहा है. निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने और कंपनियों के तिमाही नतीजों (Q1 Earnings) पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है.

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