Saturday, April 25, 2026

विजय सिन्हा ने तय किया दो साल का डेडलाइन, भूमि सर्वे अब टालना नहीं चलेगा..

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उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार में भूमि सर्वेक्षण को दो साल के भीतर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और त्रुटि या देरी पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। आम जनता से भी गड़बड़ी की सूचना देने की अपील की गई है। बैठक में सर्वेक्षण की प्रगति और चुनौतियों पर चर्चा हुई।

पटना। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण को हर हाल में दो वर्षों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। बुधवार को विभागीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह लक्ष्य अनिवार्य है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिलावार समय-सीमा में रिपोर्ट देने का निर्देश

समीक्षा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में तय समय-सीमा के अनुसार कार्य की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि भूमि सर्वेक्षण के दौरान यदि किसी प्रकार की त्रुटि या शिकायत सामने आती है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

गलती या देरी पर तय होगी जिम्मेदारी

विजय सिन्हा ने दो टूक कहा कि सर्वेक्षण में त्रुटि या अनावश्यक विलंब पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। भूमि सर्वेक्षण को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भूमि सुधार की ठोस बुनियाद बताया।

आम नागरिकों से सहयोग की अपील

उपमुख्यमंत्री ने आम लोगों से भी अपील की कि यदि भूमि सर्वेक्षण में किसी तरह की गड़बड़ी या त्रुटि दिखे, तो उसकी लिखित जानकारी विभाग को दें। इससे समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

पूर्व सर्वेक्षणों की जानकारी साझा

बैठक में प्रधान सचिव सी.के. अनिल और सचिव जय सिंह ने वर्षों पूर्व हुए कैडेस्ट्रल एवं रिवीजनल सर्वेक्षण की स्थिति से अवगत कराया। साथ ही यह भी बताया गया कि नए भूमि सर्वेक्षण से आम जनता को किस तरह के लाभ मिलेंगे।

प्रारंभिक देरी के कारण बताए

भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत ने बताया कि तकनीकी मार्गदर्शिका का समय पर निर्माण न होने से प्रारंभिक चरण में कार्य प्रभावित हुआ। यह मार्गदर्शिका मार्च 2019 में अधिसूचित की गई थी।
उन्होंने बताया कि प्रथम चरण के 20 जिलों के 89 अंचलों में विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की समय पर नियुक्ति नहीं हो पाने से दिसंबर 2021 में शुरू हुआ कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका।

सितंबर 2024 से तेज हुई सर्वे प्रक्रिया

बाद में शेष अंचलों और 18 जिलों के सभी अंचलों में सर्वे कार्य सितंबर 2024 से शुरू किया गया। फील्ड स्तर पर राजस्व संबंधी जटिलताओं के समाधान के लिए दिसंबर 2024 में 16 बिंदुओं पर विभागीय मार्गदर्शन भी अधिसूचित किया गया।

पहले चरण में ग्राम सभाओं का शत-प्रतिशत कार्य

प्रगति की जानकारी देते हुए निदेशक सुहर्ष भगत ने बताया कि प्रथम चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों के 5657 राजस्व ग्रामों में आथोफोटोग्राफ, ग्रामस्तरीय उद्घोषणा और ग्राम सभा का कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है।
किस्तवार कार्य 99.92 प्रतिशत, खानापुरी 94.4 प्रतिशत और प्रपत्र-6 का कार्य लगभग 79 प्रतिशत ग्रामों में पूर्ण हो चुका है।

अधिकार अभिलेखों का प्रकाशन जारी

उन्होंने बताया कि 67 प्रतिशत ग्रामों में प्रारूप अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं, जबकि 31 प्रतिशत ग्रामों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें से 912 ग्रामों के अभिलेखों को अधिसूचित भी किया जा चुका है।

दूसरे चरण में 36 जिलों में काम पूरा

द्वितीय चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों के 37,419 राजस्व ग्रामों में हवाई सर्वेक्षण, आथोफोटोग्राफ, ग्रामस्तरीय उद्घोषणा और ग्राम सभा का कार्य पूरा कर लिया गया है।
रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं।

प्रपत्र-5 और सीमांकन का काम प्रगति पर

लगभग 98.81 प्रतिशत ग्रामों में प्रपत्र-5 का कार्य पूर्ण हो चुका है। साथ ही त्रि-सीमाना निर्धारण और ग्राम सीमा सत्यापन का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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