Monday, May 4, 2026

वर्ष 2025 में 8 दिसंबर के बाद विवाह आदि शुभ कार्य स्थगित हो जाएंगे।

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वर्ष 2025 में 8 दिसंबर के बाद विवाह आदि शुभ कार्य स्थगित हो जाएंगे। 16 दिसंबर से खरमास शुरू होगा, जो 14 जनवरी 2026 तक रहेगा। इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। खरमास में सूर्य उपासना और दान का विशेष महत्व है। इस अवधि में पवित्र नदियों में स्नान करना और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है।

भागलपुर। वर्ष 2025 में विवाहादि शुभ कार्य के अब गिने-चुने दिन ही शेष हैं। 8 दिसंबर के बाद शादी-विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यक्रम स्थगित हो जाएंगे।

तिलकामांझी महावीर मंदिर के पंडित आनंद झा ने बताया कि सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ खरमास 16 दिसंबर (मंगलवार) को दोपहर 1:27 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। यह अवधि 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को रात 9:19 बजे सूर्य देव के उत्तरायण होने तक चलेगी। उत्तरायण के साथ ही खरमास समाप्त होगा और मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाएंगे।

खरमास में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे कार्य वर्जित

पौराणिक मान्यता के अनुसार इस महीने सूर्य देव के रथ में खर अर्थात गधे जुड़ जाते हैं, जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है। इसे ही खरमास कहा जाता है। इस अवधि को अशुभ फलकारी माना गया है, इसलिए विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन सहित कोई नया व्यापार या महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए।

सूर्य उपासना और दान का विशेष महत्व

खरमास में भगवान सूर्य की आराधना को अत्यंत शुभ माना गया है। रोज सुबह स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देने, मंत्र जाप करने और दान करने से कष्ट दूर होते हैं एवं शुभ फल मिलते हैं।

इस अवधि में पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देना, ब्राह्मणों को भोजन कराना तथा गाय को हरी घास खिलाना शुभ माना जाता है। इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है और सूर्य देव की कृपा बनी रहती है।

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