बिहार में बन रहे एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे, जिससे यात्रा का समय कम होगा और कनेक्टिविटी बेहतर होगी। भारतमाला परियोजना के तहत अमास-दरभंगा, पटना-पूर्णिया जैसे कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है, जो व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ाएंगे।
पटना। बिहार में सड़कों का जाल अब सिर्फ सफर आसान करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने वाला है। भले ही अभी तक यमुना एक्सप्रेसवे या दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी पूरी तरह चालू परियोजना यहां नहीं है, लेकिन तेजी से बन रहे हाई-स्पीड कॉरिडोर भविष्य की तस्वीर बदलने वाले हैं।
भारतमाला परियोजना से मिल रही रफ्तार
केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना के तहत बिहार में कई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे पर काम जारी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मार्गों से बेहतर तरीके से जोड़ना है।
अमास–दरभंगा एक्सप्रेसवे बनेगा रीढ़
करीब 200 किलोमीटर लंबा अमास–दरभंगा एक्सप्रेसवे बिहार का पहला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे माना जा रहा है। यह गया, पटना और दरभंगा को जोड़ते हुए राज्य के भीतर तेज और सुगम यात्रा सुनिश्चित करेगा।
पटना–पूर्णिया कॉरिडोर से बदलेगा उत्तर-पूर्व बिहार
लगभग 245 से 280 किलोमीटर लंबा पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे उत्तर-पूर्व बिहार के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर बन रही है और इससे व्यापारिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा।


