पटना। रेलवे ने रेल लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी पैनलबद्ध स्वास्थ्य सेवा संगठनों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें ओवरचार्जिंग, इलाज से इनकार, फर्जी बिलिंग और पैकेज दरों से अधिक वसूली जैसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी पत्र के अनुसार, कोई भी पैनलबद्ध अस्पताल पात्र रेल लाभार्थी को उपचार देने से मना नहीं कर सकेगा। दैनिक देखभाल, प्रयोगशाला जांच, डायलिसिस, भर्ती और ओपीडी सेवाओं सहित सभी उपचार सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध करानी होंगी।
अस्पतालों की वसूली पर लगेगी रोक
निर्देश में कहा गया है कि अस्पतालों को आपातकालीन भर्ती, वरिष्ठ नागरिकों की सीधी भर्ती तथा गैर-अभिनिर्दिष्ट मामलों की सूचना संबंधित रेलवे अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर ईमेल के माध्यम से देनी होगी। साथ ही वार्ड और आइसीयू में बेड उपलब्धता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।
रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीजों को उनकी पात्रता श्रेणी के अनुसार ही वार्ड या कमरा उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पतालों को दवाएं जेनेरिक नामों में और बड़े अक्षरों में लिखनी होंगी तथा किसी विशेष ब्रांड को बढ़ावा देने से बचना होगा।
यदि कोई लाभार्थी सीजीएचएस अथवा रेलवे द्वारा निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक लागत वाले प्रत्यारोपण या उपकरण का चयन करता है, तो अस्पताल को पूर्व सहमति लेना अनिवार्य होगा। इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख करना होगा कि अतिरिक्त खर्च का दावा रेलवे से नहीं किया जा सकेगा।
सभी पैनलबद्ध अस्पतालों को अपने परिसर में रेलवे हेल्प डेस्क या कियोस्क स्थापित करने, नोडल अधिकारी का नाम और संपर्क नंबर प्रदर्शित करने तथा रेलवे कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए अनुमोदित शुल्क दरों की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है।
FIR दर्ज करने की चेतावनी
स्वास्थ्य सेवा संगठन किसी भी लाभार्थी के यूएमआइडी अथवा रेलवे पहचान पत्र की हार्ड कॉपी अपने पास नहीं रख सकेंगे। निर्धारित पैकेज दरों से अधिक राशि वसूलना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
रेलवे बोर्ड ने फर्जी बिल या जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने को वित्तीय धोखाधड़ी बताते हुए ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने सहित कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ डी-एम्पैनलमेंट और ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। रेलवे बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय रेलों और उत्पादन इकाइयों को निर्देशित किया है कि वे इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें और सभी पैनलबद्ध अस्पतालों तक इसकी सूचना तत्काल पहुंचाएं।


