Tuesday, June 30, 2026

रिम्स की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अपर मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक की.

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रांची: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स की आधारभूत संरचना को मजबूत करने को लेकर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई. जिसमें रिम्स के सभी विभागाध्यक्षों एवं संबंधित अधिकारी शामिल हुए.

  • इस बैठक में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) संयुक्त सचिव सह निदेशक दिनेश यादव, CDAC एवं बीएसएनएल के पदाधिकारी भी मौजूद रहे. रिम्स में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, आधुनिक आधारभूत संरचना के विकास तथा अस्पताल प्रबंधन को अधिक प्रभावी एवं डिजिटल बनाने से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई.
  • इस बैठक के दौरान आपातकालीन विभाग, ट्रॉमा सेंटर एवं अस्पताल परिसर के अन्य हिस्सों की साफ-सफाई, नियमित मेंटेनेंस तथा सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया. जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं बेहतर चिकित्सकीय वातावरण उपलब्ध कराया जा सके.
  • सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से रिम्स परिसर की परिधि में बाउंड्री वॉल निर्माण के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. इसके अतिरिक्त बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए एवं विस्तारित ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) भवन के विकास की दिशा में आवश्यक पहल तेज करने का निर्देश एसीएस की तरफ से दिया गया.

बैठक के दौरान रिम्स प्रशासन ने सभी प्रस्तावित योजनाओं एवं सुधारात्मक उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया. साथ ही आश्वस्त किया कि संस्थान में मरीजों की सुविधा, अस्पताल प्रबंधन एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को निरंतर बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे.

Additional Chief Secretary review meeting regarding health services at RIMS In Ranchi

रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ शिशिर कुमार महतो ने बताया कि अस्पताल में उपलब्ध बेड एवं ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के प्रभावी प्रबंधन, संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा मरीजों को समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराने के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने पर भी सहमति बनी.

बैठक में अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (Hospital Management Information System – HMIS) को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया. इसके अंतर्गत डिजिटल डिस्चार्ज समरी, चिकित्सकों के लिए टैबलेट आधारित डिजिटल कार्यप्रणाली, मरीजों के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण तथा अस्पताल परिसर में सीसीटीवी निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत एवं व्यापक बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए.

अपर मुख्य सचिव ने बैठक के दौरान कहा कि रिम्स को आधुनिक, तकनीक-सक्षम एवं मरीज-केंद्रित चिकित्सा संस्थान के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए, ताकि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं सुगम स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें.

रिम्स परिसर के पुनर्विकास (Redevelopment) से संबंधित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में संयुक्त सचिव सह निदेशक, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन दिनेश यादव, रिम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ डीके सिन्हा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ हितेंद्र बिरुआ, उप चिकित्सा अधीक्षक, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे.

यह स्पष्ट किया गया कि फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की सेवाएं वर्तमान में नियमित रूप से संचालित हो रही हैं. प्रस्तावित पुनर्विकास योजना के अंतर्गत विभाग के पुराने भवन के स्थान पर उसी परिसर में एक आधुनिक एवं अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नया भवन निर्मित किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराना, विभागीय सुविधाओं का विस्तार करना तथा रिम्स में मरीजों को प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना है.

बैठक में न्यूरोसर्जरी विभाग के विस्तार, बेड क्षमता में वृद्धि तथा रैन बसेरा परिसर में नई चिकित्सकीय सुविधाओं के विकास की संभावनाओं की भी समीक्षा की गई. साथ ही सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों एवं आधारभूत संरचना के विकास पर भी विचार-विमर्श किया गया.

इस बैठक में रिम्स परिसर के समग्र पुनर्विकास की दिशा में चयनित पुराने भवनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर आधुनिक एवं उन्नत स्वास्थ्य अवसंरचना विकसित करने की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया. समीक्षा के दौरान पुराने बीएसएनएल कार्यालय भवन, सीनियर रेजिडेंट (एसआर) क्वार्टर तथा फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी (एफएमटी) विभाग के वर्तमान भवन को ध्वस्त कर पुनर्निर्माण किए जाने के प्रस्ताव की समीक्षा की गई. इन भवनों की वर्तमान संरचनात्मक स्थिति, सुरक्षा संबंधी पहलुओं तथा भविष्य की अधोसंरचना आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध भूमि के बेहतर उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गई.

अपर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित पुनर्विकास कार्यों से संबंधित सभी तकनीकी, प्रशासनिक एवं वैधानिक औपचारिकताएं निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप शीघ्र पूर्ण की जाएं, ताकि परियोजनाओं का क्रियान्वयन सुनियोजित एवं समयबद्ध तरीके से प्रारंभ किया जा सके.

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