हर साल 16 मई को नेशनल डेंगू डे मनाया जाता है. इसका मुख्य मकसद इंसानों को डेंगू बुखार के बारे में जागरूक करना है. डेंगू वायरस इन्फेक्टेड मादा मच्छरों, खासकर एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से लोगों में फैलता है. यह एक जानलेवा बीमारी है जो मुख्य रूप से गर्मी और बारिश के मौसम में फैलती है. इसके गंभीर मामलों में प्लेटलेट्स तेजी से गिरते हैं, जिससे इंटरनल ब्लीडिंग और ‘डेंगू शॉक सिंड्रोम’ जैसी घातक स्थिति पैदा हो सकती है.
ETV इंडिया को मिले सरकारी डेटा के मुताबिक, साल 2025 में भारत में डेंगू के कुल 1,13,440 मामले और 94 मौतें रिपोर्ट हुईं. स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी डेटा के मुताबिक, इस दौरान तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 20,866 मामले दर्ज किए गए, जबकि केरल में सबसे ज्यादा 49 मौतें दर्ज की गईं. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के जारी डेटा के आधार पर साल 2025 के लिए मुख्य राज्य-वार आंकड़े इस तरह हैं…
- तमिलनाडु: 20,866 मामले (12 मौतें)
- महाराष्ट्र: 13,333 मामले (13 मौतें)
- केरल: 10,239 मामले (49 मौतें)
- दूसरे राज्य: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और दूसरे राज्यों में भी हजारों मामले रिपोर्ट हुए है.
नेशनल डेंगू डे का महत्व
डेंगू एक बहुत ज्यादा और तेजी से फैलने वाला वायरल बुखार है, जो मादा मच्छर के काटने से फैलता है. यह एक गंभीर, फ्लू जैसी बीमारी होती है. हाल के सालों में भारत में डेंगू के मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है. पहले यह बीमारी केवल कुछ राज्यों और मुख्य रूप से शहरी इलाकों तक सीमित थी, लेकिन अब यह ग्रामीण क्षेत्रों और नए भौगोलिक इलाकों (जैसे पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और लद्दाख) में भी तेजी से पैर पसार रही है.
किसी व्यक्ति को यह बीमारी किसी फैलने वाले मच्छर के काटने के 5-6 दिन बाद होती है. नेशनल डेंगू डे 2026 की थीम है ‘डेंगू कंट्रोल के लिए कम्युनिटी पार्टनरशिप: चेक, क्लीन और कवर’. यह दिन डेंगू के बारे में जागरूकता बढ़ाने और बचाव के तरीकों को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर देता है. यह इस बीमारी को कंट्रोल करने और खत्म करने के लिए की जा रही कोशिशों पर सोचने का भी एक मौका है.
देश के हर कोने में फैल गया है डेंगू
भारत में पहली बार 1945 में डेंगू वायरस को आइसोलेट किया गया था. देश में डेंगू बुखार होने का पहला प्रमाण 1956 में तमिलनाडु के वेल्लोर जिले से मिला था. पहला डेंगूहेमोरेजिक फीवर (डीएचएफ) का प्रकोप 1963 में कोलकाता में हुआ था. भारत में लक्षद्वीप को छोड़कर लगभग सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में डेंगू पैर पसार चुका है. स्वास्थ्य मंत्रालय और चिकित्सा शोध के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं कि पिछले दो दशकों में ज्योग्राफिकल कवरेज और अर्वनाइजेशन के कारण डेंगू देश के कोने-कोने में फैल गया है. हर साल जुलाई-नवंबर की अवधि के दौरान डेंगू या डीएचएफ के मामलों में वृद्धि देखी गई है. यह बीमारी मौसम के हिसाब से फैलता है. हालांकि, देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में राज्य बारह महीने संचरण की रिपोर्ट करते हैं.

डेंगू बुखार के लक्षण
बहुत से लोगों को डेंगू इन्फेक्शन के कोई संकेत या लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें अक्सर दूसरी बीमारियों, जैसे फ्लू, समझ लिया जाता है, और ये आमतौर पर किसी संक्रमित मच्छर के काटने के चार से 10 दिन बाद शुरू होते हैं. डेंगू बुखार में तेज बुखार, 104 F (40 C) और नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण हो सकता है, जैसे कि…
- सिरदर्द
- मांसपेशियों, हड्डियों या जोड़ों में दर्द
- जी मिचलाना
- उल्टी
- आंखों के पीछे दर्द
- ग्रंथियों में सूजन
- त्वचा पर चकत्ते
ज्यादातर लोग लगभग एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं. कुछ मामलों में, लक्षण और बिगड़ जाते हैं और जानलेवा भी हो सकते हैं. इसे गंभीर डेंगू, डेंगू हेमोरेजिक बुखार या डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है. गंभीर डेंगू तब होता है जब आपकी रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और उनमें से रिसाव होने लगता है. साथ ही, आपके खून में थक्का बनाने वाली कोशिकाओं (प्लेटलेट्स) की संख्या कम हो जाती है. इससे शॉक, अंदरूनी ब्लीडिंग, अंगों का काम करना बंद कर देना और यहां तक कि मौत भी हो सकती है.
गंभीर डेंगू बुखार (जो कि एक जानलेवा आपात स्थिति है) के चेतावनी संकेत तेजी से उभर सकते हैं. ये चेतावनी संकेत आमतौर पर बुखार उतरने के एक या दो दिन बाद दिखाई देने लगते हैं, और इनमें ये शामिल हो सकते हैं. जैसे कि…
- पेट में तेज दर्द
- लगातार उल्टी होना
- मसूड़ों या नाक से खून आना
- पेशाब, मल या उल्टी में खून आना
- त्वचा के नीचे ब्लीडिंग, जो चोट लगने जैसा दिख सकता है
- सांस लेने में तकलीफ या तेज सांस लेना
- थकान
- चिड़चिड़ापन या बेचैनी शामिल है.
डॉक्टर को कब दिखाएं
गंभीर डेंगू बुखार एक जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है. अगर आप हाल ही में किसी ऐसे इलाके में गए हैं जहां डेंगू बुखार फैला हुआ है, आपको बुखार है, और डेंगू के कोई भी चेतावनी संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत मेडिकल मदद लें. चेतावनी संकेतों में पेट में तेज दर्द, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, या नाक, मसूड़ों से, उल्टी में, या मल में खून आना शामिल है.


