झारखंड के रामगढ़ में दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां एक स्कूली रिक्शा और ट्रक की टक्कर में 3 बच्चों समेत चार की मौत हो गई। इस दुर्घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि मामला बुधवार की सुबह का है।

मामला रामगढ़ के गोला थाना क्षेत्र का है। यहां के गुडविल स्कूल के बच्चे रिक्शे से जा रहे थे। ऑटोरिक्शा तिरला मोड़ पर पहुंचने के बाद हादसा हो गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। इस हादसे में तीन बच्चों समेत ड्राइवर की मौत हो गई। इसके साथ ही दर्जनभर बच्चे घायल भी हुए हैं। कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है। घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
सरकारी आदेश के बाद भी खुला था स्कूल संचालक पर होगी प्राथमिकी : डीएसई
यहां के गोला पुलिस थाना क्षेत्र में ऑटोरिक्शा और ट्रक की टक्कर में तीन बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई।
इस दुर्घटना को लेकर जानकारी देते हुए रामगढ़ के एसपी अजय कुमार ने बताया कि स्कूल के छात्र ऑटोरिक्शा से स्कूला जा रहे थे। इस दौरान एक ट्रक ने सामने से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी खतरनाक थी कि ऑटोरिक्शा में बैठे तीन स्कूली बच्चों समेत ड्राइवर की भी मौत हो गई।
मामले में डीएसई संजीत कुमार ने हिन्दुस्तान से बात करते हुए घटना पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी, गैर सरकारी स्कूलों को ठंड को देखते हुए बंद रखने के आदेश दिया गया था, इसके बाद भी स्कूल संचालक मनमानी करके स्कूल चला रहे थे। इसके लिए उनके उपर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। घटना का कारण क्या रहा इसकी भी जांच कराई जाएगी।
ओवरटेक कर रहा था ट्रक, अचानक मुड़ गया ऑटो
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बोकारो से गोला के तरफ आगे ऑटो और उसके पीछे ट्रक चल रहा था। तिरला मोड़ के पास ट्रक ऑटो को ओवरटेक करने लगा, इसी दौरान अचानक ऑटो भी तिरला की तरफ मुड़ने लगा। ऑटो को अचानक मुड़ता देख ट्रक ब्रेक लगाया लेकिन तब तक ट्रक ऑटो पर ही पलट गया। जिससे यह दर्दनाक हादसा हो गया।
घटना से शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
सरकार की ओर से ठंड को लेकर स्कूल बंद करने की घोषणा की गई। जिला स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारी भी सिर्फ स्थानीय स्तर पर आदेश निकालकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लिए। सरकारी आदेश के बाद भी पिछले दो दिनों से स्कूल चल रहे थे, इसके बावजूद अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। ग्रामीणों का कहना है कि जिल से दूर दराज के क्षेत्र में ज्यादातर स्कूल सरकारी आदेश के बाद भुले रह जाते हैं। ऐसे स्कूल संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। अधिकारी भी सिर्फ सरकारी स्कूल पर ही अपना ध्यान केंद्रित करके रखते हैं। बच्चों की मौत सड़क हादसे में जरूर हुई है लेकिन इसके लिए कहीं न कहीं शिक्षा विभाग की दोषी है। अब स्कूल संचालक पर एफआईआर का आदेश देकर एक बार फिर अधिकारी मामले से अपना पल्ला झाड़ने में जुटे हैं।


