मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन ‘मंगलकारी’ रहा. बुधवार को शुरुआती कारोबार में ही दलाल पथ पर जबरदस्त रौनक देखी गई. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कम होने के संकेतों के बीच भारतीय बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक—सेंसेक्स और निफ्टी—पूरी रफ्तार से दौड़ते नजर आए.
ट्रंप के बयान ने बदला माहौल
बाजार में इस भारी तेजी की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ जारी संघर्ष अब समाप्ति के करीब है. ट्रंप के इस रुख ने वैश्विक बाजारों में स्थिरता की उम्मीद जगा दी है. पिछले कई दिनों से युद्ध की आशंका के कारण निवेशक सहमे हुए थे, लेकिन जैसे ही शांति वार्ता की खबरें आईं, बाजार में लिवाली (खरीदारी) का सैलाब आ गया.
बाजार का ताज़ा हाल
शुरुआती कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स (Sensex) 1.70% यानी 1,303 अंक उछलकर 78,150 के स्तर पर पहुंच गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) 392 अंकों की तेजी के साथ 24,237 के पार निकल गया. बाजार के जानकारों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,250-24,300 का स्तर एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस है; यदि यह पार होता है, तो तेजी और बढ़ सकती है.
वोलेटिलिटी इंडेक्स (VIX) में भारी गिरावट
बाजार में निवेशकों के डर को मापने वाला पैमाना ‘इंडिया VIX’ आज 15.4% टूटकर 17.34 पर आ गया. VIX में इतनी बड़ी गिरावट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब ट्रेडर्स और निवेशकों के बीच अनिश्चितता कम हो रही है और वे भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त हैं.
सेक्टरवार प्रदर्शन
आज की तेजी का नेतृत्व सरकारी बैंकों (PSU Banks) और आईटी (IT) शेयरों ने किया. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एविएशन सेक्टर, विशेषकर इंडिगो के शेयरों में भी बढ़त देखी गई. दूसरी ओर, फार्मा सेक्टर आज सुस्त रहा और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 2% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई, जो बाजार के व्यापक सुधार को दर्शाता है.
कच्चे तेल से मिली राहत
भारत के लिए सबसे अच्छी खबर कच्चे तेल के मोर्चे से आई. ब्रेंट क्रूड वायदा 0.36% फिसलकर 94.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर अब कम हो रहा है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा (रुपया) को मजबूती मिली है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि माहौल सुधरा है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. इसलिए निवेशकों को अनुशासित रहकर केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही निवेश की सलाह दी जा रही है.


