रांची: रांची रेल मंडल अब केवल खिलाड़ियों को नौकरी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) की पहल पर रेलवे क्षेत्र में खेल अकादमी के विस्तार की योजना को गति दी जा रही है. इस पहल का उद्देश्य रेलवे कर्मचारियों के बच्चों के साथ-साथ रेलवे कॉलोनियों और उसके आसपास की स्लम बस्तियों में रहने वाले प्रतिभाशाली बच्चों को खेल प्रशिक्षण देकर उन्हें भविष्य का खिलाड़ी बनाना है.
- रांची रेल मंडल के पास खेलों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है. यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मौजूद हैं और रेलवे के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं, बावजूद इसके लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि इन संसाधनों का उपयोग नई प्रतिभाओं को तैयार करने के लिए और अधिक प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए. इसी सोच के साथ डीआरएम ने खिलाड़ियों के विकास को प्राथमिकता देते हुए खेल अकादमियों के विस्तार का प्रस्ताव रखा.
- रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह पहल केवल रेलवे कर्मचारियों के परिवारों तक सीमित नहीं होगी. रेलवे क्षेत्र के आसपास रहने वाले उन बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा, जो खेलों के प्रति रुचि रखते हैं लेकिन आर्थिक कारणों से उचित प्रशिक्षण नहीं प्राप्त कर पाते हैं. विशेष रूप से स्लम बस्तियों के बच्चों को नि:शुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा ताकि प्रतिभा संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रह जाए.
- वर्तमान में रेलवे परिसर में क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी के प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. फुटबॉल मैदान में क्रिकेट अकादमी भी चल रही है जबकि फुटबॉल खिलाड़ियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है. हॉकी प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है और अन्य खेलों को भी चरणबद्ध तरीके से अकादमी से जोड़ा जा रहा है. अभी 50 से अधिक बच्चे विभिन्न खेल गतिविधियों से जुड़े हुए हैं और संख्या लगातार बढ़ रही है.
- चेस, वॉलीबॉल और फुटबॉल की अकादमी शुरू
- रेलवे की योजना आने वाले समय में चेस (शतरंज), वॉलीबॉल और फुटबॉल की समर्पित अकादमी शुरू करने की है. अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे तकनीकी रूप से मजबूत बन सके और उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए तैयार हो सके.
- प्रभावी तरीका है खेल प्रतिभाओं में निवेश करना
- इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका उद्देश्य राजस्व अर्जित करना नहीं है. रेलवे का साफ मानना है कि खेल प्रतिभाओं में निवेश करना भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार करने का सबसे प्रभावी तरीका है. रेलवे वर्षों से खिलाड़ियों को खेल कोटे के माध्यम से रोजगार देता रहा है. अब प्रयास यह है कि प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से तैयार किया जाए ताकि वे राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल कर सके और भविष्य में रेलवे सहित अन्य संस्थानों में नौकरी प्राप्त कर सके.
- रेलवे के वरिष्ठ और अनुभवी खिलाड़ी भी दे रहे हैं बच्चों को प्रशिक्षण
- फिलहाल क्रिकेट प्रशिक्षण के लिए रेलवे कर्मचारियों के बच्चों से लगभग एक हजार रुपये शुल्क लिया जाता है जबकि स्लम बस्तियों के बच्चों को यह सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क दी जा रही है. प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जेएससीए से जुड़े प्रशिक्षकों की सेवाएं ली जा रही हैं. इसके अलावा रेलवे के वरिष्ठ और अनुभवी खिलाड़ी भी बच्चों को नियमित रूप से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दे रहे हैं.
- खेल संस्कृति को मजबूत करना प्रमुख लक्ष्य
- रेलवे अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य केवल कुछ खिलाड़ियों को तैयार करना नहीं बल्कि खेल संस्कृति को मजबूत करना है, यदि बच्चों को सही वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिले तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य और देश का नाम रोशन कर सकते हैं. रांची रेल मंडल की यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में झारखंड को कई नए और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिल सकते हैं.
हमारा उद्देश्य केवल खेल प्रशिक्षण देना नहीं बल्कि प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें बेहतर खिलाड़ी बनाना है. रेलवे कर्मचारियों के बच्चों के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी अवसर देकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा: ओम प्रकाश ठाकुर, जेनरल सेक्रेट्री, स्पोर्ट्स विभाग, रांची रेल मंडल


