रांची: किसी भी केस का अनुसंधान न्याय का मजबूत आधार होता है, जिसे पुलिस प्रशासन को गंभीरता और मुस्तैदी के साथ करनी चाहिए. आपराधिक मामलों का अनुसंधान सही होगा तो सजा न्यायालय द्वारा अधिक से अधिक दी जा सकेगी. इससे लोगों में डर होगा कि ऐसा करने से सजा होती है. अगर बरी होता है तो सही में जो अपराध किया, उसका उत्साह बढ़ेगा कि चलो इससे कुछ नहीं होता. यह बातें राष्ट्रीय लोक अदालत में जलसा के अध्यक्ष और हाई कोर्ट के जज जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने कही.
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान राज्यभर में प्री-लिटिगेशन 22,92,849 मामले निष्पादित हुए हैं. झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को राज्यभर के अदालतों में कुल 24,48,189 मामलों का निष्पादन हुआ जिसमें अदालतों में लंबित 1,55,340 मामले जहां निष्पादित हुए हैं. वहीं 8,53,98,66,392 रुपया का सेटलमेंट हुआ है.
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए झालसा सदस्य सचिव, कुमारी रंजना अस्थाना ने कहा कि जस्टिस सुजीत नारायण के मार्गदर्शन में झालसा और डालसा के द्वारा झारखंड राज्य के विभिन्न जिलों में अच्छा काम किया जा रहा और आगे भी क्या जायेगा. उनके दिशा-निर्देश पर न्यायिक प्रणाली की गति तेज हुई है और न्याय के प्रति आम जनमानस में विश्वास जगी है. न्याय सिर्फ न्यायालय तक ही सीमित नहीं है. अब यह जागरूकता के माध्यम से जन-जन तक पहूंच रहा है.
राष्ट्रीय लोक अदालत कार्यक्रम नहीं उत्सह है: न्यायमूर्ति
इस मौके पर जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि यह वर्ष का दूसरा राष्ट्रीय लोक अदालत है. यह एक कार्यक्रम ही नहीं बल्कि एक उत्सव है. उन्होंने कहा कि विद्वान अधिवक्ताओं को भी जागरूकता के माध्यम से लोगों को जागरूक करना चाहिए. लोग जागरूक होंगे तो अधिक से अधिक वादों का निस्तारण होगा और लोगो को निःशुल्क और शीघ्र न्याय मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि लोक अदालत एक मंच है, जहां वादों का निस्तारण एक ही मंच पर किया जाता है. इससे वादकारियों को धन और समय की बचत होती है. साथ ही न्यायालय में लंबित मामले भी कम होते हैं.
जस्टिस सुजीत नारायण ने कहा कि लोगों का परिवार, समाज और देश के विकास के लिए फोकस करना चाहिए. उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली में पीएलवी रीढ़ की हड्डी है, पीएलवी गांवों में, कस्बों में, मुहल्लों और सुदुरवर्ती क्षेत्रों में जागरूकता कर जरूरतमंदों को लाभ पहुंचा रहे है. सेमिनार में प्रचार-प्रसार के द्वारा विधिक जागरूकता पर जोर देने पर फोकस किया. कहा कि लंबित वादों के निस्तारण में अधिवक्ताओं और मध्यस्थों की भूमिका अहम है. जस्टिस सुजीत नारायण ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत वादकारियों के लिए सुलभ और निःशुल्क न्याय पाने का माध्यम है. उन्होंने पारिवारिक वादों में डिस्ट्रेश वारंट के पेंडेंसी को कम करने पर जोर दिया.
पीड़ितों के बीच की मुआवजा वितरित
आयोजित कार्यक्रम में जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायायुक्त के हाथों रांची में दीदी कैफे, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण, वलनेरेबल विटनेश डिपोजिशीन सेंटर, प्रोटेक्टेड विटनेष रूम और क्यूआर कोड जेनेरेटेड एप्लिकेशन सिस्टम का उद्घाटन भी किया गया. इस अवसर पर न्यायामूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने व्यवहार न्यायालय रांची में लगाए गए स्टॉलों का भ्रमण किया. कार्यक्रम के दौरान लोक अदालत में लाभुकों के बीच न्यायामूर्ति और न्यायायुक्त के हाथों चेक का वितरण भी किया गया. श्रीमति गीता सिंह को मोटर वाहन दुर्घटना में मिलने वाली मुआवजा के तौर 1 करोड़ 32 लाख 18 हजार 496 रूपए का चेक का वितरण किया गया.
36 पीड़ितों को दिया मुआवजा
इसके साथ ही वाहन दुर्घटना मुआवजा में न्यायिक पदाधिकारियों के द्वारा 36 पीड़ितों के बीच 20 करोड़ 6 लाख 40 हजार 672 रुपए राशि के चेकों का वितरण किया गया. राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक दण्डाधिकारियों के लिए रांची में 40 बेंच और कार्यपालक दंडाधिकारियों के लिए 20 बेंच का गठन किया गया है. जिसमे कुल लंबित मामले 47 हजार 397 और प्री-लिटिगेशन के 8 लाख 32 हजार 365 वादों का निस्तारण किया गया है. साथ ही 1 अरब 36 करोड़ 99 लाख 52 हजार 446.21 रुपए राशि का सेटलमेंट हुआ है.
इस मौके पर रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्रोही ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में वादकारियों के वादों को अधिक से अधिक निस्पादन पर ही फोकस है. धन्यवाद ज्ञापन न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के द्वारा किया गया. उन्होंने कहा कि इस दूसरी लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों के निस्तारण पर ही हमलोगों का फोकस है.
इसके लिए पूर्व में ही जिला प्रशासन बैंक और इंश्योरेंस कंपनी के साथ समंवय स्थापित कर वादकारियों को नोटिस भेजा गया है. जिससे अधिक से अधिक वादों का निस्तारण किया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक दंडाधिकारियों के लिए 40 औक कार्यपालक दंडाधिकारियों के लिए 20 बेंच का गठन किया गया है. न्यायिक दंडाधिकारियों, बैंक और इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधियों, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ पूर्व में बैठकें की गयी थी.


