रांची: पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर रविवार को झारखंड कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की अनुशासन समिति की बैठक हुई। समिति की बैठक की अध्यक्षता रामेश्वर उरांव ने की। इसी दौरान कांग्रेस कार्यालय में योगेंद्र साव ने अपने हालिया बयानों को लेकर अपना पक्ष रखा और कहा कि वह जनता से जुड़े मुद्दे उठाते रहेंगे।
योगेंद्र साव ने कहा कि उन्हें अपने बयानों के लिए माफी मांगने की जरूरत नहीं लगती। उनके मुताबिक, जनता, किसानों, छात्रों, विस्थापितों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जुड़े मुद्दों को सामने रखना उनकी जिम्मेदारी है।
गठबंधन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप
पूर्व मंत्री ने दावा किया कि झारखंड की गठबंधन सरकार में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक पार्टी कार्यकर्ताओं को अपनी समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचाने में कठिनाई होती है।
उन्होंने विस्थापन, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभावित लोगों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। योगेंद्र साव ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में विरोध करने वाले लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
झामुमो नेताओं के बयानों पर भी उठाए सवाल
योगेंद्र साव ने गठबंधन में कांग्रेस और झामुमो के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर दूसरी सहयोगी पार्टी के नेताओं की ओर से भी विवादित बयान दिए जाते हैं, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई का दायरा सभी के लिए समान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है और उसे अपने कार्यकर्ताओं तथा जनता के हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के अनुशासन और शीर्ष नेतृत्व के निर्णय का वह सम्मान करेंगे।
पार्टी संगठन को मजबूत करने की बात
योगेंद्र साव ने कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर कुछ लोग नेतृत्व को सही फीडबैक नहीं दे रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी और के. राजू के संदर्भ में यह बात कही और ऐसे लोगों की पहचान करने की आवश्यकता बताई।
पूर्व मंत्री ने कहा कि वह कांग्रेस के साथ हैं और संगठन को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि पूरे मामले में अपना पक्ष पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख चुके हैं और अंतिम फैसला हाईकमान को करना है।
पुराने अनुशासनात्मक मामले का भी किया जिक्र
योगेंद्र साव ने अपने पिछले अनुशासनात्मक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने उनके खिलाफ पहले भी कार्रवाई की थी, लेकिन बाद में निष्कासन वापस ले लिया गया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी नेतृत्व उनके पक्ष को सुनेगा।
उन्होंने अपने द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच कराने की मांग की। योगेंद्र साव ने कहा कि अगर उनके आरोप गलत साबित होते हैं तो वह राजनीति छोड़ने तक के लिए तैयार हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
JPSC-JSSC परीक्षा को लेकर भी लगाए आरोप
मीडिया से बातचीत में योगेंद्र साव ने JPSC-JSSC CGL परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि इसमें 500 करोड़ रुपये की कथित डील हुई है और मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और उन्हें उम्मीद है कि जांच को लेकर न्यायालय से आदेश आएगा।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है।
अनुशासन समिति के फैसले पर नजर
योगेंद्र साव ने एक तरफ पार्टी के फैसले को स्वीकार करने की बात कही, वहीं दूसरी ओर जनता से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख जारी रखने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि उनके बयानों का उनकी बेटी अम्बा प्रसाद के राजनीतिक करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अब कांग्रेस की अनुशासन समिति की बैठक के बाद होने वाले निर्णय पर नजर है। साथ ही गठबंधन सरकार में कांग्रेस की भूमिका, पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों और कांग्रेस-झामुमो समन्वय को लेकर उठ रहे सवालों पर भी राजनीतिक चर्चा जारी है।
