मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट ने कई अहम फैसले लिए। मुंबई में बिहार भवन के लिए 314 करोड़ और दरभंगा एयरपोर्ट के पास लॉजिस्टिक-कार्गो हब के लिए 138.82 करोड़ स्वीकृत हुए। नए वकीलों को तीन साल तक 5 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलेगा। कंडक्टर की शैक्षणिक योग्यता 10वीं से घटाकर 8वीं पास कर दी गई है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए।
रोजगार सृजन, इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर शिक्षा पर सरकार का विशेष फोकस रहा। मुंबई में बिहार भवन का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए करीब 314 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
दरभंगा एयरपोर्ट के पास लॉजिस्टिक एवं कार्गो हब निर्माण के लिए चह्नित करीब 50 एकड़ भूमि अधिग्रहण का मुआवजा देने के लिए 138.82 करोड़ रुपये की स्वीकृति कैबिनेट ने दी।
बताया गया कि इस पार्क एवं कार्गो हब के निर्माण से मिथिला एवं उत्तर बिहार के कृष एवं कृषि आधारित उत्पादों के एयर कार्गो परिवहन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इससे आर्थिक विकास एवं समग्र समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इस स्थल पर एयरो सिटी जैसी वाणिज्यिक सुविधाओं के विकास से रोजगार के नएअवसर बनेंगे।
अधिवक्ताओं को 5 हजार स्टाइपेंड
एक अहम निर्णय अधिवक्ताओं के लिए लिया गया। इसके तहत 1.1.24 या उसके बाद एनरॉल्ड हुए सभी नए अधिवक्ताओं को तीन वर्ष तक 5 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा।
अधिवक्ता संघों को ई लाइब्रेरी की स्थापना के लिए एकमुश्त पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके लिए बिहार अधिवक्ता कल्याण समिति को 30 करोड़ दिए जाने का निर्णय लिया गया।
अब कंडक्टर के लिए भी आठवीं पास जरूरी
वाहन चालकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस तो संवाहक यानी कंडक्टर के लिए कंडक्टर लाइसेंस जरूरी है। इसकी समीक्षा में पता चला कि ड्राइविंग लाइसेंस की तुलना में संवाहक लाइसेंस की संख्या काफी कम है।
इसका मुख्य कारण शैक्षणिक योग्यता को देखा गया। दरअसल ड्राइवर के लिए योग्यता आठवीं उत्तीर्ण तय है लेकिन कंडक्टर के लिए 10वीं है। अब नियम में बदलाव करते हुए कंडक्टर की शैक्षणिक योग्यता भी आठवीं तय की गई है।


