नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही को रचनात्मक और सार्थक बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच है और यहां होने वाली सकारात्मक चर्चा देश के विकास को नई गति दे सकती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव सदन के समक्ष रखने की तैयारी में है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दल लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए चर्चा में सक्रिय भागीदारी करेंगे और जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक सहयोग देंगे।
तर्क और तथ्यों पर आधारित हो चर्चा
पीएम मोदी ने कहा कि संसद में संवाद तथ्यों और तर्कों के आधार पर होना चाहिए। उनका मानना है कि हर सांसद को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए और सभी विचारों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने अनुभवी सांसदों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके अनुभव का लाभ देश और संसद दोनों को मिलना चाहिए।
वैश्विक हालात और भारत की अर्थव्यवस्था
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व सहित दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों का असर ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, जिससे तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
इसके बावजूद उन्होंने कहा कि भारत ने आर्थिक मोर्चे पर मजबूती दिखाई है और लगभग 7.7 प्रतिशत की विकास दर के साथ दुनिया की प्रमुख तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए रखी है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक क्षमता और लचीलेपन का प्रमाण बताया।
सुधारों और नवाचार पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में देश में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति मिली है। उन्होंने राजस्थान में नई तेल रिफाइनरी के शुभारंभ, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रगति और ग्रीन हाइड्रोजन से संचालित ट्रेन जैसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारत के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों और श्रमिकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं।
युवाओं की उपलब्धियों का किया उल्लेख
पीएम मोदी ने भारत के युवाओं की नवाचार क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि देश के स्टार्टअप और युवा वैज्ञानिक अंतरिक्ष सहित कई आधुनिक क्षेत्रों में नई पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं की प्रतिभा और संभावनाएं असीमित हैं तथा यही देश के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मानसून सत्र के दौरान संसद में रचनात्मक चर्चा और सकारात्मक सहयोग के माध्यम से देश के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकेंगे, जिससे आम नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।


