Monday, September 28, 2026

भू-माफिया और पुलिस की कथित मिलीभगत पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब.

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने कांके थाना क्षेत्र से जुड़े एक भूमि विवाद मामले में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को कहा है। मामला एक आदिवासी महिला की पैतृक जमीन पर कथित कब्जे और इस प्रकरण में स्थानीय पुलिस की कथित भूमिका से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।

खतियानी जमीन पर कब्जे का आरोप

याचिका के मुताबिक विवाद कांके अंचल के मौजा-हुसिर में स्थित खाता संख्या 58 और प्लॉट संख्या 381 व 382 की जमीन से संबंधित है। याचिकाकर्ता सुभासो देवी का दावा है कि यह उनकी पैतृक और खतियानी भूमि है, जिस पर कथित तौर पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की गई।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि जमीन से जुड़े विवाद में भू-माफियाओं की भूमिका की जांच जरूरी है। साथ ही, मामले में तत्कालीन कांके थाना प्रभारी प्रकाश रजक की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।

स्वतंत्र जांच की मांग

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से जमीन पर कथित अवैध कब्जे और भू-माफियाओं तथा पुलिस अधिकारियों के बीच संभावित मिलीभगत की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

इसके अलावा संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और जांच के दौरान आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध भी अदालत से किया गया है।

परिवार की सुरक्षा की भी मांग

याचिका में सुभासो देवी ने अपने परिवार और संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है। उन्होंने अदालत से उनकी वैध भूमि में कथित अवैध हस्तक्षेप रोकने के लिए उचित आदेश देने का भी आग्रह किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता वाजिद अली और अधिवक्ता शैयाकुर रहमान ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।

याचिकाकर्ता का कहना है कि विवाद महज जमीन के स्वामित्व तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, मामला एक आदिवासी परिवार की संपत्ति की सुरक्षा और पुलिस की कथित निष्क्रियता अथवा भूमिका से भी संबंधित है। अदालत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष का जवाब अभी आना बाकी है।

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