नई दिल्ली: भारत का गिग वर्किंग सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. जॉब प्लेटफॉर्म ‘फाउंडिट’ की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, गिग इकोनॉमी अब केवल कम कौशल वाले और अधिक संख्या वाले कामों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक विशेषज्ञता और क्षमता आधारित इकोसिस्टम में बदल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब कंपनियों का ध्यान हाई-स्किल रिमोट भूमिकाओं और टियर-2 शहरों के टैलेंट की तरफ तेजी से बढ़ रहा है.
व्हाइट-कॉलर गिग जॉब्स में रिकॉर्ड वृद्धि
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत में व्हाइट-कॉलर गिग नौकरियों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है. वित्त वर्ष 2025 (FY25) में यह संख्या 68 लाख थी, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 82.3 लाख हो गई है. अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 तक यह आंकड़ा 1.02 करोड़ (10.2 मिलियन) को पार कर जाएगा. अब ‘प्रोजेक्ट-बेस्ड हायरिंग’ यानी किसी खास प्रोजेक्ट के लिए विशेषज्ञों को नियुक्त करना कंपनियों के लिए एक सामान्य मॉडल बन चुका है.
AI और सीनियर पदों पर फ्रीलांसरों की मांग
पहले गिग वर्किंग का मतलब केवल छोटे स्तर के काम माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. फाउंडिट की मार्केटिंग वीपी अनुपमा भीमराजका के अनुसार, बड़े संगठन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वरिष्ठ प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं के लिए गिग हायरिंग का सहारा ले रहे हैं. स्टार्टअप्स के अलावा स्थापित कंपनियां भी उन क्षेत्रों में गिग वर्कर्स को नियुक्त कर रही हैं जहाँ विशिष्ट कौशल की कमी है.
ग्रोथ इंजन बन रहे टियर-2 शहर
इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत टियर-2 शहर बनकर उभरे हैं. रिपोर्ट का अनुमान है कि गिग हायरिंग में इन शहरों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 के 30.7% से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 तक 38.8% हो जाएगी.
प्रमुख टैलेंट हब: कोयंबटूर, वडोदरा, कोच्चि और इंदौर जैसे शहर अब बड़े टैलेंट सेंटर के रूप में पहचान बना रहे हैं.
उभरते बाजार: जयपुर, चंडीगढ़, भुवनेश्वर और लखनऊ जैसे शहरों में भी क्रिएटिव, कंसल्टिंग, एनालिटिक्स और डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े गिग रोल में भारी बढ़त देखी जा रही है.
हाइब्रिड और रिमोट वर्किंग मॉडल की बढ़ती स्वीकार्यता ने कंपनियों के लिए टैलेंट तक पहुंच आसान कर दी है. आईटी सेवाओं, मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के विस्तार के कारण अब छोटे शहरों के कुशल पेशेवर भी वैश्विक स्तर के प्रोजेक्ट्स पर घर बैठे काम कर रहे हैं. भारत की गिग इकोनॉमी अब चपलता और उच्च प्रभाव वाले कौशल की ओर मजबूती से बढ़ रही है.


