मुंबई: भारत की आर्थिक प्रगति को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए सेवा निर्यात को सिर्फ आईटी और पारंपरिक व्यावसायिक सेवाओं तक सीमित रखने के बजाय नए क्षेत्रों में विस्तार करना जरूरी है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के एक सत्र में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि वैश्विक वित्तीय सेवा बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी अभी काफी कम है। ऐसे में फिनटेक के जरिए भारत के लिए सेवा निर्यात के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
670 अरब डॉलर के बाजार में भारत की हिस्सेदारी करीब 1%
राजेश अग्रवाल के अनुसार, वैश्विक स्तर पर वित्तीय सेवाओं का कारोबार करीब 670 अरब डॉलर का है। इसके मुकाबले भारत से इस क्षेत्र में लगभग 8 अरब डॉलर का सेवा निर्यात होता है। यानी वैश्विक वित्तीय सेवा व्यापार में भारत की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से थोड़ी अधिक है।
वाणिज्य सचिव ने भारतीय फिनटेक कंपनियों की क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के लिए यह अंतर कम करने की काफी गुंजाइश है। खास बात यह है कि वित्तीय सेवा निर्यात में करीब 95 प्रतिशत सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे भारतीय विशेषज्ञ देश में रहते हुए भी दूसरे देशों के ग्राहकों को सेवाएं प्रदान कर पा रहे हैं।
सेवा निर्यात में आईटी पर निर्भरता घटाने की जरूरत
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 863 अरब डॉलर रहा, जिसमें सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 421 अरब डॉलर थी। हालांकि, राजेश अग्रवाल ने सेवा निर्यात की मौजूदा संरचना को लेकर एक चुनौती की ओर ध्यान दिलाया।
उन्होंने कहा कि भारत का सेवा निर्यात मुख्य रूप से दो बड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। आईटी और आईटीईएस से जुड़ी सेवाओं का योगदान करीब 50 प्रतिशत, जबकि व्यावसायिक सेवाओं की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। ऐसे में भविष्य की वृद्धि को ज्यादा टिकाऊ बनाने के लिए निर्यात के नए क्षेत्रों को विकसित करना आवश्यक है।
सीमा पार भुगतान में भारत के लिए बड़ा अवसर
वाणिज्य सचिव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले भुगतान और रेमिटेंस की लागत कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, मौजूदा समय में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट मार्केट करीब 182 से 190 अरब डॉलर का है। इसके वर्ष 2032 तक बढ़कर 350 से 360 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
वहीं, कार्ड और पेमेंट से जुड़ा बाजार भी 2028-29 तक करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इन क्षेत्रों में सालाना लगभग 9 से 10 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि देखने को मिल रही है।
UPI को बताया डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण
राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत के पास बड़े पैमाने पर फिनटेक समाधान विकसित करने का अनुभव है। UPI को उन्होंने इसका प्रमुख उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि यूपीआई के माध्यम से वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और लेनदेन की लागत घटाने में मदद मिली है। भारत के पास अब इस अनुभव का इस्तेमाल दूसरे देशों की जरूरतों के अनुरूप डिजिटल वित्तीय समाधान विकसित करने का अवसर है।
वाणिज्य सचिव के मुताबिक, फिनटेक में मौजूद इन संभावनाओं का लाभ उठाकर भारत अपने सेवा निर्यात का दायरा बढ़ा सकता है और आर्थिक विकास को अधिक विविध एवं टिकाऊ आधार दे सकता है।
