न्यूयॉर्क: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, समझौते का 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। अब दोनों पक्ष कुछ लंबित तकनीकी और अंतिम मुद्दों पर सहमति बनाने में जुटे हैं।
अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया कि जल्द ही इस समझौते को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है। उनके अनुसार, व्यापार नीति लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों में संवेदनशील विषय रही है, लेकिन बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है।
व्यापार संबंधों में नए दौर की उम्मीद
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर कई मुद्दों पर लंबे समय से बातचीत चलती रही है। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक प्रस्तावित समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकता है और द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
अक्टूबर में भारत आएंगे मार्को रुबियो
समझौते को लेकर गतिविधियां ऐसे समय तेज हुई हैं, जब दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनयिक संपर्क भी जारी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अक्टूबर 2026 में भारत दौरे की योजना है।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर 2026 में अमेरिका के फ्लोरिडा में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए जाएंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच कुछ महत्वपूर्ण रणनीतिक एवं आर्थिक घोषणाएं सामने आ सकती हैं।
क्वाड सहयोग पर भी नजर
भारत और अमेरिका के संबंधों में क्वाड भी अहम भूमिका निभा रहा है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक सहयोग को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। मई 2027 में नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक प्रस्तावित है।
इस बैठक के जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आपसी समन्वय से जुड़े मुद्दों पर आगे की दिशा तय करने की उम्मीद है।
IMEC कॉरिडोर को गति देने की तैयारी
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा यानी IMEC भी दोनों देशों के सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई है, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिति सामान्य होने के बाद काम में तेजी आ सकती है।
भारत और अमेरिका इस कॉरिडोर से जुड़े शिपिंग और लॉजिस्टिक्स मार्गों की तैयारी पर काम कर रहे हैं। सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन और इजरायल भी अपने-अपने हिस्से से संबंधित तैयारियों को आगे बढ़ा रहे हैं।
