जैसलमेर | 3 नवंबर 2026 | Defence News: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात और युद्ध के नए तौर-तरीकों को देखते हुए भारतीय सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रखना बेहद जरूरी है। आधुनिक तकनीक, ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की बढ़ती भूमिका के बीच सेना की क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा।
राजस्थान के सीमावर्ती शहर जैसलमेर स्थित होटल फोर्ट रजवाड़ा में मंगलवार को रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य एजेंडा भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण रहा। इसमें समिति के सदस्यों के साथ तीनों सेनाओं के सैन्य अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सीमावर्ती क्षेत्र में बैठक का खास महत्व
राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमावर्ती इलाके में बैठक आयोजित करने का उद्देश्य केवल औपचारिक चर्चा करना नहीं है। इससे समिति के सदस्यों को सीमा क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों और अग्रिम इलाकों की चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, संसद सत्र के दौरान समिति की बैठकों के लिए पर्याप्त समय निकालना मुश्किल होता है। सत्र के बाहर होने वाली बैठकों में सदस्यों को विस्तार से विचार रखने और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने का मौका मिलता है। जैसलमेर का चयन भी समिति के सदस्यों के सुझावों के आधार पर किया गया।
उन्होंने कहा कि समिति के सदस्य रक्षा से जुड़े मुद्दों पर जो सुझाव देते हैं, वे नीतियों और तैयारियों को बेहतर बनाने में उपयोगी साबित होते हैं।
रूस-यूक्रेन और इजराइल-ईरान संघर्ष से मिले नए संकेत
रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया में तेजी से बदल रहे भू-राजनीतिक हालात का असर भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं पर भी पड़ता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-ईरान संघर्ष जैसी घटनाओं ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को सामने रखा है।
उन्होंने कहा कि अब युद्ध में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारतीय सेनाओं को मौजूदा जरूरतों के साथ आने वाले समय की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयारियां करनी होंगी।
रक्षा बजट और खरीद प्रक्रिया पर विशेष ध्यान
सेना के आधुनिकीकरण के तीन प्रमुख पहलुओं का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने रक्षा बजट और पूंजीगत खरीद को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जरूरी हैं।
सरकार का जोर केवल रक्षा बजट बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उपलब्ध धनराशि का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर भी है। इसके तहत सेनाओं की जरूरत के मुताबिक आधुनिक उपकरणों और संसाधनों की खरीद पर ध्यान दिया जा रहा है।
रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के पार
रक्षा मंत्री ने देश में रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 में भारत का रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
इसी तरह रक्षा निर्यात वर्ष 2014 में दो हजार करोड़ रुपये से कम था, जो अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को तीन लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। राजनाथ सिंह ने भरोसा जताया कि भारत रक्षा निर्यात के निर्धारित लक्ष्य को भी पार कर सकता है।
DRDO और निजी कंपनियों की बढ़ रही भूमिका
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक अब रक्षा तैयारियों का अभिन्न हिस्सा बन गई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से नई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। साथ ही नई रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों और अन्य उपकरणों का परीक्षण भी किया जा रहा है।
रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। एमएसएमई से लेकर बड़ी कंपनियां तक इस क्षेत्र में योगदान दे रही हैं। रक्षा मंत्री ने भारतीय कंपनियों के कामकाज पर संतोष जताते हुए कहा कि देश में रक्षा उद्योग की क्षमताएं लगातार विकसित हो रही हैं।
सैन्य संगठन और मानव संसाधन में बदलाव पर जोर
आधुनिकीकरण के तीसरे प्रमुख पहलू के रूप में रक्षा मंत्री ने मानव संसाधन और सैन्य संगठनात्मक ढांचे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के बावजूद युद्ध में प्रशिक्षित और सक्षम मानव संसाधन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है।
बदलती परिस्थितियों के अनुरूप तीनों सेनाओं के संगठनात्मक ढांचे में भी सुधार किए जा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की नई फॉर्मेशन्स के संदर्भ में असनी, भैरव और शक्तिबाण का उल्लेख किया।
आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था बनाना सरकार का लक्ष्य
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सैन्य आधुनिकीकरण का अर्थ केवल नए हथियार और उपकरण खरीदना नहीं है। इसका उद्देश्य सेनाओं की तैयारियों को मजबूत करना, स्वदेशी तकनीक विकसित करना और देश में एक सक्षम रक्षा इकोसिस्टम तैयार करना भी है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक स्वायत्तता जरूरी है। भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करते हुए घरेलू उद्योगों और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना होगा।
बैठक से पहले भाजपा नेताओं ने की मुलाकात
संसदीय समिति की बैठक से पहले होटल फोर्ट रजवाड़ा में स्थानीय भाजपा नेताओं ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इस दौरान जैसलमेर नगर परिषद सभापति विजय डांगरा, भाजपा नेता कंवराज सिंह चौहान और विधायक छोटूसिंह भाटी के निजी सचिव दीप सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
नेताओं ने रक्षा मंत्री का स्वागत किया। मुलाकात के दौरान संगठनात्मक गतिविधियों के अलावा जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों की परिस्थितियों, सीमा से जुड़े मुद्दों और स्थानीय विकास से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।
वॉर म्यूजियम में देखा भारतीय सेना का गौरवशाली इतिहास
जैसलमेर दौरे के दौरान सोमवार देर शाम राजनाथ सिंह आर्मी स्टेशन परिसर स्थित वॉर म्यूजियम पहुंचे। यहां उन्होंने भारतीय सेना के शौर्य और सैन्य इतिहास पर आधारित लाइट एंड साउंड शो देखा।
रक्षा मंत्री ने म्यूजियम की विजिटर बुक में अपने अनुभव भी दर्ज किए। इस दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्य भी मौजूद रहे।
जैसलमेर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
रक्षा मंत्री और संसदीय समिति के सदस्यों के दौरे को देखते हुए जैसलमेर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। पुलिस, सेना और बॉर्डर होमगार्ड के जवानों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं। कार्यक्रम स्थलों और प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए।
जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे ने बताया कि वीवीआईपी दौरे को लेकर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस और सेना के अधिकारी आपसी समन्वय के साथ व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दौरे के दौरान सुरक्षा, यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
Bharat Superfast News | Defence Desk
