Sunday, May 3, 2026

बिहार स्वास्थ्य विभाग ने नर्सों के मातृत्व अवकाश की प्रक्रिया को सरल किया है।

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बिहार स्वास्थ्य विभाग ने नर्सों के मातृत्व अवकाश की प्रक्रिया को सरल किया है। अब अवकाश की स्वीकृति राज्य मुख्यालय के बजाय जिला स्तर पर सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेज अधीक्षक और अति विशिष्ट अस्पताल के निदेशक देंगे। यह निर्णय प्रशासनिक दबाव कम करने और नर्सों को समय पर सुविधा देने के लिए लिया गया है। 180 दिनों का सवैतनिक अवकाश अधिकतम दो जीवित संतानों के लिए मान्य है, जिससे अनावश्यक देरी समाप्त होगी।

पटना। बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने नर्सों के मातृत्व अवकाश से जुड़ी प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है।

अब राज्य मुख्यालय के बजाय जिला स्तर पर ही नर्सों के मातृत्व अवकाश को स्वीकृति दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने नर्सों के मातृत्व अवकाश की स्वीकृति का अधिकार जिलों के सिविल सर्जनों के साथ ही मेडिकल कालेज अस्पताल के अधीक्षक, अति विशिष्ट अस्पताल के निदेशकों को सौंपा है।

लंब‍ित फाइलों को देखते हुए ल‍िया गया फैसला 

विभाग ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग ने यह फैसला राज्य मुख्यालय पर लगातार बढ़ते प्रशासनिक दबाव और लंबित फाइलों को देखते हुए लिया है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत बिहार स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत नर्सों को 180 दिनों का मातृत्व अवकाश दिया जाता है। यह अवकाश पूर्णत: सवैतनिक होता है और अधिकतम दो जीवित संतानों तक ही मान्य है। 

अबतक राज्‍य मुख्‍यालय से मिलता था अवकाश 

अब तक इस अवकाश की स्वीकृति के लिए फाइलें राज्य मुख्यालय भेजी जाती थीं, जिससे प्रक्रिया में अनावश्यक देरी

होती थी और नर्सों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर पर अधिकार दिए जाने से न केवल अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि नर्सों को समय पर सुविधा भी मिल सकेगी।

इससे राज्य मुख्यालय पर कार्यभार भी कम होगा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। विभाग ने सभी जिलों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

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