पटना | 30 अक्टूबर 2026
बिहार में सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 1,711 पदों पर नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन संख्या 04/2025 से 28/2025 तक के सभी विज्ञापनों को रद्द कर दिया है। इसके बाद अब पूरी भर्ती प्रक्रिया नए सिरे से शुरू किए जाने की तैयारी है।
इस फैसले से उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है, जो आवेदन करने के बाद चयन प्रक्रिया के अगले चरणों तक पहुंच चुके थे।
स्वास्थ्य विभाग ने वापस ली पुरानी अधियाचना
मिली जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए पहले भेजी गई अधियाचना वापस ले ली है। इसके बाद BPSC ने संबंधित विज्ञापनों को रद्द करने का निर्णय लिया।
अब स्वास्थ्य विभाग संशोधित रिक्तियों के आधार पर आयोग को नई अधियाचना भेजेगा। इसके बाद BPSC की ओर से नए सिरे से भर्ती विज्ञापन जारी किया जाएगा। नई अधियाचना में पदों और रिक्तियों का विवरण क्या होगा, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन तक पहुंच गई थी भर्ती प्रक्रिया
इस नियुक्ति प्रक्रिया में कई अभ्यर्थी आवेदन के बाद आगे के चरणों में शामिल हो चुके थे। कुछ उम्मीदवारों के लिए प्रक्रिया डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन तक पहुंच गई थी।
ऐसे में विज्ञापन रद्द होने से अभ्यर्थियों के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। उन्हें अब नई भर्ती प्रक्रिया और उसके नियमों को लेकर आयोग के आधिकारिक निर्देशों का इंतजार है।
अभ्यर्थियों के सामने ये बड़े सवाल
विज्ञापन रद्द होने के बाद उम्मीदवारों के बीच असमंजस की स्थिति है। मुख्य सवाल हैं:
- क्या पुराने आवेदकों को नए विज्ञापन के तहत फिर से आवेदन करना होगा?
- पहले जमा किए गए आवेदन और दस्तावेजों का क्या होगा?
- डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में शामिल अभ्यर्थियों को कोई राहत मिलेगी?
- नई भर्ती में पदों की संख्या और चयन प्रक्रिया में क्या बदलाव होंगे?
इन सवालों पर स्वास्थ्य विभाग और BPSC की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
संशोधित रिक्तियों के आधार पर होगी नई बहाली
अब असिस्टेंट प्रोफेसर के 1,711 पदों पर नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग की नई अधियाचना और BPSC के नए विज्ञापन पर निर्भर करेगी। फिलहाल अभ्यर्थियों को आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।
लंबे समय से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह फैसला अहम है, क्योंकि नई प्रक्रिया शुरू होने पर आवेदन और चयन के पुराने चरणों की मान्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी होगा।
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