Monday, August 24, 2026

बिहार में 12 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन जुटाने की नई रणनीति, रैयतों को मिलेंगे चार विकल्प.

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पटना: बिहार में प्रस्तावित 12 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। जमीन को लेकर स्थानीय स्तर पर सामने आ रही आपत्तियों के बीच अब सरकार किसानों और रैयतों से सीधे संवाद करेगी। उन्हें जमीन उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग विकल्पों और उनसे जुड़े लाभों की जानकारी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर नगर विकास एवं आवास विभाग की टीम संबंधित क्षेत्रों में जाकर जमीन मालिकों से बातचीत करेगी। सरकार का प्रयास है कि टाउनशिप के लिए अधिक से अधिक भूमि आपसी सहमति और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई जाए।

लैंड पूलिंग को प्राथमिकता

सरकार की पहली प्राथमिकता लैंड पूलिंग के माध्यम से जमीन जुटाने की है। इस व्यवस्था में रैयत अपनी जमीन विकास परियोजना के लिए उपलब्ध कराते हैं और क्षेत्र के विकास के बाद उन्हें विकसित भूमि का एक हिस्सा वापस दिया जाता है।

प्रस्ताव के अनुसार, लैंड पूलिंग में जमीन मालिकों को विकसित क्षेत्र में करीब 55 प्रतिशत भूमि वापस देने का प्रावधान बताया गया है। यह जरूरी नहीं होगा कि लौटाई गई जमीन उसी स्थान पर हो, जहां मूल भूखंड स्थित था।

टाउनशिप क्षेत्र में सड़क, नाली, पार्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की भी योजना है।

जमीन खरीदने या अधिग्रहण का विकल्प

यदि किसी क्षेत्र में लैंड पूलिंग के जरिए आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो सरकार जमीन खरीदने का रास्ता अपना सकती है। संबंधित रैयतों से पहले आपसी सहमति से जमीन उपलब्ध कराने के लिए बातचीत की जाएगी।

जरूरत पड़ने पर लागू कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिग्रहण का विकल्प भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आवश्यक भूमि जुटाने में इस व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

आपसी सहमति पर अतिरिक्त लाभ का प्रस्ताव

तीसरे विकल्प के तहत सरकार रैयतों के साथ आपसी सहमति से समझौता करने का प्रयास करेगी। इसके बदले जमीन मालिकों को कुछ अतिरिक्त लाभ दिए जाने का प्रस्ताव है।

इनमें अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR), ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) और विकास शुल्क में छूट जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।

चौथा विकल्प होगा हाइब्रिड मॉडल

यदि किसी क्षेत्र में अलग-अलग विकल्पों से जमीन उपलब्ध कराने में कठिनाई आती है, तो सरकार हाइब्रिड मॉडल अपना सकती है। इसमें लैंड पूलिंग, सहमति से जमीन लेना, जमीन की खरीद और आवश्यकता पड़ने पर अधिग्रहण जैसे तरीकों का संयोजन किया जाएगा।

इसका उद्देश्य टाउनशिप के लिए जरूरी भूमि जुटाने की प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाना है।

पाटलिपुत्र टाउनशिप को लेकर भी तैयारी

प्रस्तावित परियोजनाओं में पाटलिपुत्र टाउनशिप भी शामिल है। इसकी योजना को करीब 30 सेक्टर में विकसित करने का प्रारूप तैयार किया गया है। परियोजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का आकलन करने के लिए अध्ययन कराया जा रहा है।

अध्ययन और जमीन उपलब्ध कराने से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

किसानों से संवाद पर सरकार का जोर

जमीन से जुड़े मामलों में स्थानीय विरोध को देखते हुए सरकार अब सीधे रैयतों के साथ संवाद करने की रणनीति पर काम कर रही है। विभागीय टीम किसानों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया, विभिन्न विकल्पों और संभावित लाभों की जानकारी देगी।

सरकार की कोशिश है कि परियोजनाओं के लिए भूमि जुटाने की प्रक्रिया में अधिक से अधिक सहमति बनाई जाए और स्थानीय लोगों की चिंताओं को बातचीत के जरिए दूर किया जा सके।

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