Patna News | 3 नवंबर 2026: बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के बाद प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की मुहिम की प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल रहा है। बिजली कंपनी अब उन इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने पर अधिक ध्यान दे रही है, जहां से राजस्व मिलने की संभावना ज्यादा है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों और बीपीएल परिवारों के घरों में मीटर लगाने की रफ्तार को अपेक्षाकृत कम प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं, बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अभियान के केंद्र में लाया गया है।
राजस्व की संभावना के आधार पर तय हो रही प्राथमिकता
बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के शुरुआती अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों को भी व्यापक रूप से कवर करने पर जोर दिया गया था। लेकिन बाद में सामने आया कि गांवों में बड़ी संख्या ऐसे घरों की है, जहां बिजली की खपत 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सीमा के भीतर ही रहती है। ऐसे उपभोक्ताओं से कंपनी को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना कम है।
अधिकारियों के मुताबिक, कई ग्रामीण परिवार शहरों में रहते हैं और केवल विशेष अवसरों पर ही अपने गांव स्थित घरों में आते हैं। ऐसे मकानों में बिजली कनेक्शन तो मौजूद है, लेकिन नियमित खपत काफी कम रहती है। इस वजह से इन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने को अब पहले जैसी प्राथमिकता नहीं मिल रही है।
कम बिजली खपत वाले घरों से सीमित राजस्व
गांवों में नियमित रूप से रहने वाले कई परिवारों की बिजली खपत भी सीमित बताई जा रही है। ऐसे घरों में मुख्य रूप से बल्ब, पंखे और कुछ मामलों में पानी का पंप इस्तेमाल होता है। खपत कम होने के कारण 125 यूनिट की मुफ्त बिजली सीमा पार नहीं होती और बिजली कंपनी को अतिरिक्त भुगतान के रूप में बहुत कम राजस्व प्राप्त होता है।
करीब 90 लाख BPL परिवार भी प्राथमिकता से बाहर
बिहार में गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल श्रेणी के परिवारों की संख्या करीब 90 लाख बताई गई है। बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, इन परिवारों के घरों में भी बिजली की खपत सामान्यतः 125 यूनिट से अधिक नहीं होती। ऐसे में इन घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने से कंपनी को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना सीमित है।
इसी वजह से बीपीएल परिवारों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान को फिलहाल अपेक्षाकृत कम प्राथमिकता दी जा रही है।
बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर बढ़ा फोकस
बिजली कंपनी की नई रणनीति में अब बाजार, दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रमुखता से शामिल हैं। स्मार्ट मीटर लगाने वाली एजेंसियां ऐसे इलाकों में अधिक सक्रिय हैं, जहां व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
खास तौर पर नए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और विकसित हो रहे बाजार क्षेत्रों को अभियान के लिए प्राथमिकता दी जा रही है। कंपनी की कोशिश ऐसे उपभोक्ताओं तक स्मार्ट मीटर की पहुंच बढ़ाने की है, जहां बिजली की खपत और राजस्व की संभावना अधिक है।
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