Wednesday, November 4, 2026

10वीं-12वीं में अब रटने से नहीं चलेगा काम, समझ और कौशल पर आधारित होंगे सवाल

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Patna News | 3 नवंबर 2026: बिहार में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं का स्वरूप आने वाले वर्षों में बदलने की तैयारी है। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब विद्यार्थियों की केवल याद करने की क्षमता नहीं, बल्कि विषयों की समझ, तार्किक सोच और सीखे हुए ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने की योग्यता का आकलन किया जाएगा। इसके लिए प्रश्नपत्रों में दक्षता आधारित और विश्लेषणात्मक सवाल शामिल करने की योजना है।

इस बदलाव की तैयारी के तहत मंगलवार से एनसीईआरटी के परख (PARAKH) की ओर से चार दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई है। इसमें बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB), एससीईआरटी और चयनित मास्टर ट्रेनर हिस्सा ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान नए परीक्षा पैटर्न और योग्यता आधारित प्रश्न तैयार करने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।

10वीं और 12वीं के प्रश्नपत्रों में क्या होगा बदलाव?

नई व्यवस्था में विद्यार्थियों को केवल किताबों के उत्तर याद करके परीक्षा देने के बजाय विषय को समझकर सवालों के जवाब देने होंगे। प्रश्नपत्रों में ऐसे प्रश्न शामिल किए जाएंगे, जिनमें तथ्यों की व्याख्या, विश्लेषण और सीखी गई जानकारी के व्यावहारिक इस्तेमाल की क्षमता परखी जा सके।

अब तक विद्यार्थी अक्सर पिछले तीन से पांच वर्षों के प्रश्नपत्रों और निर्धारित पैटर्न के आधार पर परीक्षा की तैयारी करते रहे हैं। प्रस्तावित बदलाव के बाद वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जुड़े सवाल भी पूछे जा सकते हैं। इससे विद्यार्थियों की विषय पर पकड़ और समस्या को समझने की क्षमता का आकलन होगा।

देश का 28वां शिक्षा बोर्ड बना बिहार

परख के रिसोर्स पर्सन अमनदीप के अनुसार, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत देश के 27 शिक्षा बोर्डों में काम पूरा किया जा चुका है। बिहार इस प्रक्रिया से जुड़ने वाला देश का 28वां शिक्षा बोर्ड है।

कार्यशाला में बाल वाटिका से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिए कौशल और दक्षता आधारित पाठ्यक्रम तैयार करने की जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य स्कूली शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को बेहतर तरीके से परखना है।

देशभर के बोर्डों के लिए तैयार होगा साझा क्वेश्चन बैंक

नई परीक्षा प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए देश के विभिन्न शिक्षा बोर्डों के लिए एक समतुल्य प्रश्न बैंक तैयार किया जा रहा है। इसमें अलग-अलग विषयों के दक्षता आधारित प्रश्न और उनके स्वरूप शामिल होंगे।

इस प्रश्न बैंक से शिक्षा बोर्डों को नए पैटर्न के अनुरूप प्रश्नपत्र तैयार करने में मदद मिलेगी। योजना है कि आने वाले वर्षों में इस व्यवस्था को देशभर के शिक्षा बोर्डों की परीक्षाओं में लागू किया जाए।

शैक्षणिक सत्र 2027-28 से सरकारी स्कूलों में शुरुआत

बिहार के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों को दक्षता आधारित सवालों के जरिए पढ़ाई और अभ्यास कराने की योजना है। इसके लिए शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कक्षा में ऐसे प्रश्नों को शामिल किया जाएगा, जिनसे यह समझा जा सके कि विद्यार्थी किसी विषय को कितनी अच्छी तरह समझ रहे हैं और अपनी जानकारी का इस्तेमाल किस तरह कर पा रहे हैं।

मूल्यांकन के साथ ओएमआर और डिजिटल टूल्स की ट्रेनिंग

चार दिवसीय कार्यशाला में मास्टर ट्रेनरों को मूल्यांकन के नियमों और निर्धारित मानकों की जानकारी भी दी जाएगी। इसका मकसद अलग-अलग शिक्षा बोर्डों में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया में एकरूपता लाना है।

इसके अलावा ओएमआर शीट भरने, डेटा मैपिंग और डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कार्यशाला पूरी होने के बाद चयनित मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।

विद्यार्थियों की तैयारी का तरीका भी बदल सकता है

नई परीक्षा प्रणाली लागू होने पर विद्यार्थियों को केवल महत्वपूर्ण प्रश्नों और पुराने प्रश्नपत्रों पर निर्भर रहने के बजाय पूरे विषय को समझकर पढ़ाई करनी होगी। अवधारणाओं को स्पष्ट करना, तर्क के साथ उत्तर देना और पढ़ी हुई जानकारी को अलग-अलग परिस्थितियों में लागू करना तैयारी का अहम हिस्सा बन सकता है।

हालांकि, बिहार बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में नए पैटर्न को किस चरण में और किस रूप में पूरी तरह लागू किया जाएगा, इसकी विस्तृत आधिकारिक परीक्षा-वार रूपरेखा सामने आना बाकी है।

Bharat Superfast News | Patna

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