Monday, September 14, 2026

बिहार में किसानों के लिए सोलर सिंचाई की नई पहल, खेतों तक पहुंचेगा पानी और घटेगा बिजली-डीजल का खर्च.

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Bihar Solar Irrigation: बिहार में खेती की सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में नई पहल की जा रही है। किसानों को सिंचाई के लिए महंगी बिजली और डीजल पंप पर निर्भरता से राहत देने के उद्देश्य से सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके तहत खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए सोलर पैनल से चलने वाले पंप का इस्तेमाल किया जाएगा।

‘आशा मॉडल’ पर हो रहा काम

इस परियोजना के लिए ‘आशा मॉडल’ (Automated Solar Powered Based High Efficiency Irrigation Application) विकसित किया जा रहा है। इसमें बिहार की पारंपरिक आहर-पाइन जल प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा जाएगा।

इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य खेती के लिए सिंचाई की लागत कम करना और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है। सौर ऊर्जा से पंप चलने के कारण किसानों की बिजली और डीजल पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

पालीगंज में तैयार हो रही व्यवस्था

इस योजना के तहत पारंपरिक जल स्रोतों के आसपास सोलर पैनल लगाए जाने की तैयारी है। इन पैनलों से मिलने वाली बिजली का इस्तेमाल सिंचाई पंप चलाने में किया जाएगा। पंप के जरिए जल स्रोतों से पानी खेतों तक पहुंचाया जाएगा।

पटना के पालीगंज इलाके में इस तरह की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी की जा रही है। परियोजना की एक खास बात यह भी है कि सिंचाई की जरूरत पूरी होने के बाद बची हुई सौर ऊर्जा को सरकारी बिजली ग्रिड में भेजने की व्यवस्था की जा सकती है।

बारिश का पानी भी किया जाएगा संग्रहित

प्रस्तावित सिस्टम में मानसून के दौरान होने वाली बारिश और नहरों से मिलने वाले पानी को आहर या तालाब जैसे जल स्रोतों में जमा किया जाएगा। जब खेतों में सिंचाई के लिए पानी की जरूरत होगी, तब सिस्टम के जरिए पंप को स्वचालित रूप से संचालित किया जा सकेगा।

सोलर पैनल से मिलने वाली ऊर्जा से पंप चलेंगे और पानी को खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे सिंचाई व्यवस्था को बिजली की उपलब्धता पर कम निर्भर रखने की कोशिश होगी।

किसानों को क्या फायदा होगा?

सौर ऊर्जा आधारित इस मॉडल से किसानों को कई स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

  • सिंचाई के लिए डीजल पंप पर निर्भरता कम हो सकती है।
  • महंगी बिजली से होने वाला खर्च घटाने में मदद मिलेगी।
  • कम बारिश की स्थिति में भी उपलब्ध जल स्रोतों का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जा सकेगा।
  • भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने से पानी की बर्बादी कम करने में मदद मिल सकती है।
  • सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से सिंचाई व्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकेगा।
  • सिंचाई के बाद अतिरिक्त सौर बिजली को ग्रिड में भेजने की व्यवस्था होने पर ऊर्जा का अतिरिक्त उपयोग संभव होगा।

कुल मिलाकर, ‘आशा मॉडल’ के जरिए पारंपरिक जल संसाधनों और सौर ऊर्जा को एक साथ जोड़कर बिहार में खेती की सिंचाई व्यवस्था को कम लागत वाली और तकनीक आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है।

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