Wednesday, June 17, 2026

पानी की समस्या और जल संसाधनों के संरक्षण को लेकर सरायकेला-खरसावां जिल के कुचाई प्रखंड के बंदोलोहार पंचायत अंतर्गत बंगुरडीह गांव में आदिवासी यात्रा कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड के बंगुरडीह गांव में आयोजित आदिवासी यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने जल संकट और सिंचाई समस्याओं पर चर्चा की. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

 पानी की समस्या और जल संसाधनों के संरक्षण को लेकर सरायकेला-खरसावां जिल के कुचाई प्रखंड के बंदोलोहार पंचायत अंतर्गत बंगुरडीह गांव में आदिवासी यात्रा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने पेयजल, सिंचाई और जल संरक्षण से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की. युवा, बुजुर्ग एवं महिलाओं ने समूह चर्चा के माध्यम से गांव का जल संसाधन मानचित्र तैयार किया, जिसमें खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत, सिंचाई व्यवस्था के लिए नहरों के गहरीकरण, कुओं की मरम्मत, तालाबों की वर्तमान स्थिति तथा जलमीनारों की स्थिति को चिह्नित किया गया.

पुरानी जल स्थिति पर चर्चा 

बैठक में बुजुर्गों ने बढ़ते जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त करते हुए दो पीढ़ी पहले की जल स्थिति का उल्लेख किया. उन्होंने कहानी और अनुभवों के माध्यम से युवाओं को बताया कि पहले गांवों में जल स्रोतों की स्थिति कैसी थी तथा समुदाय किस प्रकार जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा मानता था. बुजुर्गों ने कहा कि जल स्रोत केवल पानी का माध्यम नहीं हैं, बल्कि उनसे स्थानीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन भी जुड़ा हुआ है.

जल स्रोतों के सांस्कृतिक महत्व पर चिंता 

ग्रामीणों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि नई पीढ़ी धीरे-धीरे जल स्रोतों से जुड़े सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को भूलती जा रही है. उन्होंने कहा कि जल स्रोतों की पवित्रता एवं उनके सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.

चापाकल मरम्मत का आश्वासन 

बैठक के दौरान ही पेयजल और स्वच्छता विभाग (पीएचईडी) के संबंधित अधिकारी को दूरभाष के माध्यम से गांव की समस्याओं से अवगत कराया गया. अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि खराब चापाकलों की मरम्मत शीघ्र कराई जाएगी, जिससे गांववासियों को राहत मिल सके. यह अभियान अपना अधिकार संगठन, हो समाज महासभा एवं मुंडा-मानकी व्यवस्था के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जा रहा है. 

जल समस्याओं के चिन्हांकन का अभियान

अभियान के तहत कुचाई प्रखंड के 10 तथा खरसावां प्रखंड के 10 गांवों में जल, सिंचाई और पेयजल से जुड़ी समस्याओं को चिन्हित किया जा रहा है. यात्रा पूर्ण होने के बाद पंचायत और प्रखंड स्तर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें जनप्रतिनिधि, जल संसाधन एवं पेयजल विभाग के अधिकारी, स्थानीय पत्रकार, सामाजिक संगठन और मुंडा-मानकी व्यवस्था के प्रतिनिधि शामिल होंगे. 

स्थायी समाधान के लिए संवाद पहल 

संवाद के माध्यम से समन्वय स्थापित कर सिंचाई और शुद्ध पेयजल की समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में पहल की जायेगी. बैठक की अध्यक्षता ग्राम मुंडा सह ग्रामसभा अध्यक्ष साधु चरण सोय ने की. कार्यक्रम में जाबी सोय, तुराम सोय, बागुन सोय, आकाश सोय, तुरी सोय, लक्ष्मी सोय, लिजय सोय, करन सोय, रामाय सोय, मोनोर गोप, चंद्रिका ताती, रेशमी गोप, सुखलाल गोप, श्याम सोय, सोमवार गोप, रीना गोप, गोपीनाथ सोय, नामसी कुई, बसंती सोय, रामराय सोय, सिकंदर सोय, मनोज कुमार सोय, बूढ़न सिंह सोय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.

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