Monday, April 20, 2026

पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण आज सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती गिरावट दर्ज की गई.

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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह की शुरुआत सुस्त रही. सोमवार, 20 अप्रैल को शुरुआती कारोबार के दौरान घरेलू शेयर सूचकांकों—सेंसेक्स और निफ्टी—में गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में पैदा हुआ नया भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है.

बाजार का ताजा हाल
शुरुआती कारोबार में बीएसई (BSE) सेंसेक्स 232 अंक या 0.29 प्रतिशत गिरकर 78,261 के स्तर पर कारोबार करता दिखा. वहीं, एनएसई (NSE) निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक यानी 0.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,241 के स्तर पर आ गया. बाजार में यह बिकवाली मुख्य रूप से रियल्टी, मेटल और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में देखी गई.

गिरावट की बड़ी वजह: हॉर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
बाजार में आई इस ताजा घबराहट की मुख्य वजह ईरान और अमेरिका के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ा तनाव है. ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर फिर से शिपिंग प्रतिबंध लगाने की खबरों ने वैश्विक बाजार में चिंता पैदा कर दी है. इससे पहले ईरान ने इस मार्ग को खोलने की घोषणा की थी, लेकिन ताजा पाबंदियों ने अनिश्चितता बढ़ा दी है.

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मिडल ईस्ट में तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है. ब्रेंट क्रूड 7.18 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 96.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी करीब 8.76 प्रतिशत बढ़कर 91.20 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया. भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति (Inflation) के लिहाज से चिंताजनक हैं.

इन शेयरों में रही गिरावट
आज के कारोबार में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी लाइफ और बीईएल (BEL) जैसे बड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया. हालांकि, बैंकिंग क्षेत्र के अच्छे नतीजों ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता भारी रही.

विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में बाजार की दिशा पूरी तरह से वैश्विक स्थिरता पर निर्भर है. जब तक भू-राजनीतिक मोर्चे पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले सत्र में खरीदारी की थी, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) द्वारा बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली करने से दबाव बढ़ गया है. फिलहाल निवेशकों को ‘देखो और प्रतीक्षा करो’ की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है.

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