पलामू:नक्सल हिंसा, पलायन, अकाल, सुखाड़ के लिए चर्चित पलामू का इलाका अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए जूझ रहा है. अब यह इलाका मरीजों के मौत के लिए चर्चित हो रहा है. पलामू में मेडिकल कॉलेज रहने के बावजूद लोगों को इलाज के लिए जूझना पड़ रहा और उनकी मौत हो रही है. सात और आठ मई को पलामू में चार मौतें हुई हैं. पलामू में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और खिलवाड़ करने का आरोप निजी अस्पतालों के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों पर भी लग रहा है.
पलामू में मेडिकल कॉलेज के अलावा 160 से अधिक निजी और सरकारी अस्पताल संचालित हैं. सबसे अधिक लापरवाही प्रसव के दौरान और बच्चों के इलाज में हो रही है. पलामू में जनवरी 2025 से अब तक 12 से अधिक लोगों की मौत हुई. पलामू के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान पैसे मांगने का भी आरोप लगा था, जिसके बाद सीएम ने पूरे मामले में हस्तक्षेप किया था. इसके बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और सभी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है.
केस स्टडी -01
07 मई को पलामू के मेदिनीनगर के निजी अस्पताल गोदावरी में प्रसव के दौरान पहले बच्चे की मौत हो गई और बाद में बच्चे की मां की मौत हो गई थी. मृतक लातेहार के बरवाडीह के इलाके के रहने वाले थे. मौत के बाद अस्पताल के डॉक्टर और कर्मी फरार हो गए थे. बाद में जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया था और सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.
केस स्टडी 02
पलामू के पांकी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक गर्भवती महिला महिला को प्रसव पीड़ा के बाद भर्ती कराया गया था. प्रसव के दौरान बच्चे की मौत हो गई थी और महिला को रेफर कर दिया गया था. बाद में महिला की भी मौत हो गई थी.
अन्य घटनाएं
जुलाई 2025 में पांकी के इलाके में ही प्रसव के दौरान ममता देवी नामक महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई थी. अगस्त 2025 में पलामू के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र में ऑपरेशन के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई थी. इसके अलावा कई ऐसी घटनाएं हैं जिसमें गलत इंजेक्शन और प्रसव के दौरान मौतें हुई हैं.
वहीं इस संबंध में कांग्रेस नेता मणिकांत सिंह कहते हैं कि पलामू के सरकारी और निजी अस्पताल सिर्फ रिम्स रेफर करने के लिए है. लगातार लोगों की मौत हो रही है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है.

जिला प्रशासन ने कार्रवाई के लिए तैयार की योजना
पलामू जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए कार्य योजना तैयार की है. डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत के नेतृत्व में एक टीम ने मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का जायजा लिया और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए हैं. पलामू में सरकारी अस्पतालों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है.
वहीं निजी अस्पतालों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है. निजी अस्पताल अब डाटा जिला प्रशासन को उपलब्ध करवाने लगे हैं. डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने बताया कि अस्पतालों के लिए गाइडलाइन जारी किए गए हैं. लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
रेफर टू रिम्स की पहचान को खत्म करना है बड़ी चुनौती
पलामू के मेदिनीनगर में मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल है. इस अस्पताल में दुर्घटना के शिकार लोग, गोली लगने से घायल लोग और प्रसव करवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. यह प्रमंडल का सबसे बड़ा रेफरल अस्पताल है. प्रतिदिन 400 से 500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, लेकिन इस अस्पताल की पहचान रेफर टू रिम्स हो गई है.
गोली लगने वाली हर एक घटना को रेफर कर दिया जाता है, जबकि दुर्घटना के मामलों में बड़ी संख्या में मरीजों को रेफर किया जाता है. मेदिनीनगर से रांची की दूरी करीब चार घंटे की है. इतनी देर में कई लोगों की जान भी चली जाती है.

“जो घटनाएं हुई हैं सभी मामलों एफआईआर दर्ज की गई है और कार्रवाई जारी है. लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और सख्ती बरती जा रही है. अस्पतालों को लेकर गाइडलाइन जारी किए गए हैं और दिशा निर्देश भी दिए गए हैं.“- डॉ अनिल कुमार श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, पलामू


