Saturday, September 12, 2026

पलामू टाइगर रिजर्व में वन शहीदों को श्रद्धांजलि, जंगल और वन्यजीवों की रक्षा में 13 कर्मियों ने गंवाई जान.

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पलामू। पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के बेतला नेशनल पार्क में शुक्रवार को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस मनाया गया। इस अवसर पर अधिकारियों और वन विभाग के कर्मचारियों ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले वनकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।

झारखंड में वर्ष 2025 से राष्ट्रीय वन शहीद दिवस मनाया जा रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व में इस कार्यक्रम का आयोजन दूसरी बार किया गया।

अधिकारियों ने शहीद वनकर्मियों को किया नमन

कार्यक्रम में पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक सह मुख्य वन संरक्षक (CCF) एसआर नटेश, डिप्टी डायरेक्टर प्रजेशकांत जेना के अलावा गढ़वा उत्तरी और गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल के डीएफओ मौजूद रहे।

अधिकारियों ने वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के दौरान अपनी जान गंवाने वाले कर्मचारियों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण को याद किया गया।

वन्यजीवों की सुरक्षा में 13 कर्मियों की शहादत

पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के दौरान अब तक 13 वनकर्मी शहीद हो चुके हैं। इनमें कुछ कर्मचारियों की जान नक्सली हमलों के दौरान गई, जबकि अन्य ने तस्करों, शिकारियों और जंगल में ड्यूटी के दौरान उत्पन्न जोखिमों का सामना करते हुए अपना जीवन गंवाया।

PTR निदेशक एसआर नटेश ने कहा कि वनकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने कर्तव्य से पीछे हटने के बजाय जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। लकड़ी तस्करों और शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान भी कई कर्मचारियों को गंभीर जोखिम उठाना पड़ा।

अलग-अलग वर्षों में शहीद हुए वनकर्मी

पलामू टाइगर रिजर्व के रिकॉर्ड के अनुसार, अलग-अलग वर्षों में कई वनकर्मियों ने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाई।

  • 1989: कांस्टेबल विश्राम राय
  • 1990: वनरक्षक गणेश राय और ललन राय
  • 1998: चालक अजीज कुरैशी और ट्रैकर सुखदेव परहिया
  • 1999: ट्रैक्टर चालक भगवती यादव
  • 2004: ट्रैक्टर चालक जीतन सिंह और तपेश्वर सिंह
  • 2004: वनरक्षक दानियाल खलखो और चालक सीताराम यादव
  • 2023: देव कुमार प्रजापति

वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इन कर्मचारियों का बलिदान विभाग के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले वनकर्मियों के योगदान को याद रखना समाज की जिम्मेदारी भी है।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने शहीद वनकर्मियों के सम्मान में श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अधूरे दायित्वों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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