पटना में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या से निपटने के लिए अब तकनीक का सहारा लेने की तैयारी है। पथ निर्माण विभाग ने शहर के ट्रैफिक मैनेजमेंट को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना पर काम शुरू किया है।
इस प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए संभावित ट्रैफिक जाम का अनुमान पहले ही लगाया जा सकेगा। इतना ही नहीं, दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में एंबुलेंस को प्राथमिकता देने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने में भी AI की मदद लेने की योजना है।
30-40 मिनट पहले मिल सकता है जाम का अलर्ट
पटना के लिए तैयार किए गए तकनीकी ड्राफ्ट के मुताबिक, प्रस्तावित AI सिस्टम किसी इलाके में संभावित जाम का 30 से 40 मिनट पहले पूर्वानुमान लगा सकेगा।
इस जानकारी के आधार पर ट्रैफिक सिग्नल के संचालन और जरूरत पड़ने पर रूट डायवर्जन में बदलाव किया जा सकेगा। इससे जाम बढ़ने से पहले ही ट्रैफिक को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
इसके लिए शहर में पहले से मौजूद इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके ऊपर एक नई इंटेलिजेंस लेयर विकसित करने का प्रस्ताव है, जो अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण करेगी।
दुर्घटना की पहचान से एंबुलेंस तक, AI करेगा मदद
प्रस्तावित सिस्टम में सड़क दुर्घटनाओं का स्वतः पता लगाने की सुविधा भी शामिल है। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही सिस्टम नजदीकी एंबुलेंस को अलर्ट कर सकेगा।
इसके बाद एंबुलेंस के लिए प्राथमिकता वाला रास्ता तैयार करने की योजना है। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा सकता है, ताकि ट्रैफिक में फंसने के कारण मरीज को अस्पताल पहुंचने में देरी न हो।
योजना के तहत आपात स्थिति में मरीज को लगभग 10 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पीएमसीएच समेत प्रमुख अस्पतालों की तरफ जाने वाले मार्गों पर भी एंबुलेंस को प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था विकसित करने पर जोर है।
इन इलाकों पर रहेगा खास फोकस
पटना के कई प्रमुख ट्रैफिक दबाव वाले इलाकों को इस योजना में प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इनमें शामिल हैं:
- डाकबंगला
- पटना जंक्शन रोड
- जीपीओ गोलंबर
- एग्जीबिशन रोड
- बोरिंग रोड
- गांधी मैदान
- अशोक राजपथ
- सगुना मोड़
- अनीसाबाद
- बेली रोड
शहर में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के साथ अतिक्रमण तथा ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं होना भी जाम की वजहों में शामिल है। ऐसे क्षेत्रों में डेटा के आधार पर अलग-अलग ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान तैयार करने की योजना है।
ई-रिक्शा और ऑटो के लिए डिजिटल व्यवस्था
पटना में ई-रिक्शा और ऑटो के अनियंत्रित ठहराव की समस्या को भी तकनीक के जरिए नियंत्रित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए जियोफेंसिंग, वर्चुअल स्टैंड और डिजिटल शेड्यूलिंग जैसे विकल्पों पर काम किया जा सकता है।
रेलवे स्टेशन और बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में ऑटो व ई-रिक्शा कहां और कितनी देर रुकेंगे, इसे डिजिटल सिस्टम के जरिए व्यवस्थित करने की योजना है।
इसके अलावा पटना मेट्रो स्टेशनों के आसपास यात्रियों की आवाजाही और ड्रॉप-ऑफ व्यवस्था को भी तकनीक की मदद से मैनेज करने का प्रस्ताव रखा गया है।
पार्किंग और अतिक्रमण पर भी होगी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत सड़कों पर होने वाली अनधिकृत पार्किंग और अतिक्रमण की पहचान करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सड़क पर उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल करना और ट्रैफिक की आवाजाही को सुचारू बनाना है।
ट्रैफिक ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों की उपस्थिति की निगरानी के लिए अटेंडेंस मॉनीटरिंग सिस्टम का प्रस्ताव भी सामने आया है।
बारिश और जलजमाव के दौरान प्रभावित सड़कों की पहले से पहचान कर वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी देने की व्यवस्था भी विकसित की जा सकती है। इससे जलजमाव के कारण मुख्य सड़कों पर अचानक बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
पथ निर्माण विभाग ने किया तकनीकी ड्राफ्ट का प्रस्तुतीकरण
पटना के ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर शनिवार को पथ निर्माण विभाग के सभागार में एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने और जाम की समस्या के तकनीकी समाधान पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में आर्केडिस आईबीआई ग्रुप की ओर से पटना के लिए तैयार ट्रैफिक मैनेजमेंट का तकनीकी ड्राफ्ट प्रस्तुत किया गया। इसमें AI, डेटा एनालिटिक्स और एकीकृत तकनीकी प्लेटफॉर्म को प्रमुख आधार बनाया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल ने की। सीआरआरआई के पूर्व निदेशक और आईआईटी बॉम्बे के पूर्व प्रोफेसर पीके सिकदर तथा आर्केडिस आईबीआई ग्रुप के इंडिया ऑपरेशन्स के कंट्री हेड वेंकटा चुंदुरू ने भी ट्रैफिक व्यवस्था और संभावित समाधानों पर प्रस्तुतीकरण दिया।
बैठक में पटना नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन, बीएसआरडीसीएल, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
पथ निर्माण विभाग का उद्देश्य पटना में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए ऐसी कार्ययोजना तैयार करना है, जिसे तकनीक की मदद से जमीन पर लागू किया जा सके।
