Tuesday, May 5, 2026

पछुआ हवा के चलते राज्य के 28 जिलों में तापमान गिर गया है….

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बिहार में अगले 48 घंटों में ठंड बढ़ने की आशंका है। पछुआ हवा के चलते राज्य के 28 जिलों में तापमान गिर गया है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवा का रुख बदलने से तापमान में कमी आई है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है

पटना। राज्य में ठंड ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। रविवार को पटना सहित 28 जिलों के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। किशनगंज में न्यूनतम तापमान 12.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे कम है।

Bihar Weather News के मुताबिक राज्य के अधिकतर हिस्सों में सुबह में हल्का कोहरा छाया रहा और गुलाबी ठंड महसूस की गई। हालांकि दिन चढ़ा तो धूप खिली और मौसम सामान्य हो गया।

3 डिग्री सेल्सियस तक गिरेगा तापमान (Bihar Weather Forecast)

मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार 48 घंटे के दौरान न्यूनतम तापमान में एक से तीन डिग्री की गिरावट की संभावना है। रात्रि के ठंड में थोड़ी वृद्धि होगी, जबकि दिन में आसमान साफ रहेगा, धूप निकलने से मौसम सामान्य बना रहेगा।

अधिकतम तापमान में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी। आगामी पांच से छह दिनों तक राज्य का मौसम शुष्क रहेगा। पटना सहित सभी जिलों में सुबह में धुंध का प्रभाव बना रहेगा। उत्तरी भाग में कोहरा घना होगा।

रविवार को सबसे कम दृश्यता छह सौ मीटर पूर्णिया में दर्ज की गई। अररिया जिले के फारबिसगंज में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सर्वाधिक रहा।

प्रमुख शहरों का तापमान

शहरअधिकतम (डिग्री सेल्सियस)न्यूनतम (डिग्री सेल्सियस)
पटना26.517.2
गया26.614.2
भागलपुर26.215.8
मुजफ्फरपुर25.217.6

बच्चों में बीमारियों का खतरा

ठंड के प्रवेश के साथ ही मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। बदलते मौसम का सबसे अधिक प्रभाव दो वर्ष तक की आयु के बच्चों पर देखा जा रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि इस समय वायरस का प्रकोप बढ़ जाता है, इससे नन्हे बच्चों में सर्दी-खांसी, बुखार और सांस लेने में परेशानी के मामले बढ़ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में आरएसवी वायरस, न्यूमोनिया और ब्रोंकियोलाइटिस के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। ठंड लगने से कई बच्चों में तेज बुखार, नाक बहना, खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।

छोटे बच्चों में ड्रापलेट्स के माध्यम से संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है। इसलिए माता-पिता को बच्चों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने और हल्की-फुल्की समस्या को भी नजरंदाज नहीं करने की सलाह दी।

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