Sunday, May 3, 2026

नए शैक्षणिक सत्र से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी में नामांकन के लिए एक ही परीक्षा होगी।

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नए शैक्षणिक सत्र से बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी में नामांकन के लिए एक ही प्रवेश परीक्षा होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है। इससे छात्रों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों में बार-बार टेस्ट नहीं देना पड़ेगा। विभाग सहायक प्राध्यापक के लिए नेट की तर्ज पर बेट शुरू करने और मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना के तहत 100 छात्रों को विदेश में अध्ययन के लिए स्कॉलरशिप देने की भी तैयारी कर रहा है

पटना। नए शैक्षणिक सत्र से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी में नामांकन के लिए एक ही परीक्षा होगी। इसको लेकर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे स्वीकृति के लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति कार्यालय को यथाशीघ्र भेजा जाएगा।

सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी में नामांकन हेतु एक ही परीक्षा कराने का निर्णय बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद ने 2023 में ही लिया था। इस व्यवस्था के लागू होने से छात्रों को अलग-अलग विश्वविद्यालय में प्री-पीएचडी के लिए टेस्ट नहीं देना पड़ेगा।

एक ही परीक्षा के माध्यम से विषय विशेष में सीट की उपलब्धता एवं आरक्षण के रोस्टर के हिसाब से उनका पीएचडी में नामांकन संभव होगा।

उच्च शिक्षा निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग के स्तर से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक की अर्हता के लिए नेट की तर्ज पर बेट शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार कर उस पर स्वीकृति ली जाएगी।

इसके अलावा बिहार राज्य उत्तर शिक्षा परिषद का प्रतीक चिह्न, वार्षिक प्रतिवेदन, नियमावली निर्मित करने, चार वर्षीय बीएससी, बीए, बीएड एकीकृत पाठयक्रम संरचना तैयार करने पर भी विभागीय सहमति बनी है। विदेशों के नामचीन संस्थानों में अध्ययन के लिए मुख्यमंत्री स्कालरशिप योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इस योजना के क्रियान्वयन के बाद प्रतिवर्ष 100 छात्र-छात्राओं को विदेश में उच्च स्तरीय अध्ययन के लिए स्कॉलरशिप दी जाएगी। राज्य सरकार द्वारा पीएचडी में शोधरत छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना की कार्य योजना बनाने का फैसला लिया गया है।

आर्यभट्ट बिहार रिसर्च प्रोजेक्ट स्कीम के तहत मुख्यमंत्री पीएचडी फैलोशिप योजना की कार्य योजना बनाने का आदेश दिया गया। ताकि, बड़े-बड़े तथा संवेदनशील मामलों पर शोध कार्य किया जा सके।

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