Tuesday, May 5, 2026

नए लेबर कोड के तहत अब 30 से अधिक बची छुट्टियों का हर साल पैसा मिलेगा, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक लाभ और बड़ी राहत मिलेगी.

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नई दिल्ली: देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों के छुट्टियों के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किए गए हैं. अब काम के दबाव में अपनी छुट्टियां न ले पाने वाले कर्मचारियों को नुकसान नहीं उठाना होगा. नए नियमों के अनुसार, साल के अंत में बची हुई अतिरिक्त छुट्टियों के बदले कर्मचारियों को हर साल नकद भुगतान किया जाएगा.

क्या है नया नियम और कैसे होगा फायदा?
वर्तमान व्यवस्था में अक्सर निजी कंपनियों में ‘यूज़ इट और लूज़ इट’ की पॉलिसी होती है, जिसमें साल खत्म होते ही बची हुई छुट्टियां शून्य हो जाती थीं. लेकिन ‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) कोड, 2020’ के तहत अब कोई भी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष के अंत में अधिकतम 30 दिन की अर्जित छुट्टियां (Earned Leave) ही अगले साल के लिए बचा कर रख सकेगा.

यदि किसी कर्मचारी के पास 30 दिन से अधिक छुट्टियां बचती हैं, तो कंपनी को उन अतिरिक्त दिनों का पैसा अनिवार्य रूप से कर्मचारी के खाते में जमा करना होगा. उदाहरण के तौर पर, यदि आपके पास साल के अंत में 45 छुट्टियां बची हैं, तो 30 छुट्टियां अगले साल के खाते में जुड़ जाएंगी और बाकी 15 दिनों का पैसा आपको मिल जाएगा.

छुट्टियों की पात्रता और अन्य बड़े बदलाव
180 दिन का नियम: पहले ‘अर्न लीव’ का हकदार बनने के लिए साल में 240 दिन काम करना जरूरी था, जिसे घटाकर अब 180 दिन कर दिया गया है. यानी अब नए कर्मचारी भी जल्दी छुट्टियां कमाने के पात्र होंगे.

बॉस के मना करने पर राहत: यदि कोई कर्मचारी छुट्टी मांगता है और प्रबंधन उसे ठुकरा देता है, तो वे छुट्टियां ’30 दिन की सीमा’ में नहीं गिनी जाएंगी. ऐसी स्थिति में कर्मचारी 30 से अधिक छुट्टियां भी जमा कर सकेगा.

फुल एंड फाइनल सेटलमेंट: नौकरी छोड़ने या हटाए जाने की स्थिति में, अब कंपनियों को 2 वर्किंग डेज (48 घंटे) के भीतर कर्मचारी का सारा बकाया और छुट्टियों का पैसा चुकाना होगा.

बढ़ेगी हाथ में आने वाली रकम
नए लेबर कोड में ‘वेतन’ की परिभाषा भी बदली गई है, जिससे मूल वेतन कुल सीटीसी का कम से कम 50% होगा. चूंकि लीव इनकैशमेंट की गणना बेसिक सैलरी पर होती है, इसलिए अब छुट्टियों के बदले मिलने वाली राशि पहले के मुकाबले काफी अधिक होगी. साथ ही, सरकार ने लीव इनकैशमेंट पर टैक्स छूट की सीमा को भी ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख कर दिया है, जिससे कर्मचारियों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा.

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