Wednesday, July 8, 2026

नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रक्रियाओं के डिजिटाइजेशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

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रांचीः नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रक्रियाओं के डिजिटाइजेशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इसी दिशा में रांची विश्वविद्यालय भी तेजी से कदम बढ़ा रहा है. विश्वविद्यालय को पूरी तरह पेपरलेस बनाने की तैयारी शुरू हो गई है और इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से इसे ‘ई-समर्थ (e-Samarth) पोर्टल’ से जोड़ा जा रहा है. इस पोर्टल के लागू होने के बाद विश्वविद्यालय के अधिकांश प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य डिजिटल माध्यम से संचालित होंगे, जिससे कागजी प्रक्रिया कम होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को सेवाएं समय पर मिल सकेंगी.

  • रांची विश्वविद्यालय पहले से ही प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षा फॉर्म भरने की व्यवस्था को ऑनलाइन मोड में संचालित कर रही है. छात्र विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से परीक्षा कार्यक्रम, परीक्षा से जुड़ी सूचनाएं और अन्य महत्वपूर्ण अपडेट प्राप्त कर रहे हैं. अब अगला लक्ष्य परीक्षा शाखा समेत अन्य विभागों को पूरी तरह मैन्युअल व्यवस्था से हटाकर ऑनलाइन प्रणाली में लाना है.
  • रांची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. राजकुमार शर्मा ने खास बातचीत में बताया कि नई शिक्षा नीति और केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप विश्वविद्यालय डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, समय की मांग है कि विश्वविद्यालय की सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन हों. सबसे पहले परीक्षा विभाग को मैन्युअल व्यवस्था से पूरी तरह ऑनलाइन किया जा रहा है. परीक्षा फॉर्म, विभिन्न प्रकार के आवेदन और डिग्री वितरण जैसी सेवाओं को डिजिटल बनाया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को बिना परेशानी के सुविधाएं मिल सकें. भविष्य में डिग्रियां भी ऑनलाइन माध्यम से लाभार्थियों तक उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है.
  • विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि ई-समर्थ पोर्टल लागू होने के बाद विद्यार्थियों का डाटा सुरक्षित रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा. इससे रिकॉर्ड प्रबंधन आसान होगा, फाइलों के खोने की संभावना कम होगी और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ेगी. साथ ही विभिन्न विभागों के बीच समन्वय भी बेहतर होगा.
  • हालांकि इस पहल के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. विश्वविद्यालय के पुराने रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, कर्मचारियों को नई प्रणाली का प्रशिक्षण, तकनीकी ढांचे को मजबूत करना और इंटरनेट आधारित सेवाओं को निर्बाध बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी होगी.

रांची विश्वविद्यालय का यह डिजिटल बदलाव एक महत्वपूर्ण कदम

शिक्षा विशेषज्ञ और डीएसपीमयू के पूर्व वीसी एसएन मुंडा का मानना है कि इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान होने पर ही डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह सफल हो सकेगी. वहीं छात्रों का कहना है कि देश के अधिकांश विश्वविद्यालय लंबे समय से डिजिटल मोड में काम कर रहे हैं, जबकि रांची विश्वविद्यालय और इससे अलग होकर बने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में अब भी कई प्रक्रियाएं पारंपरिक तरीके से संचालित होती हैं. विद्यार्थियों का मानना है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से समय की बचत होगी, कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और प्रमाणपत्र व अन्य सेवाएं अधिक तेजी से उपलब्ध हो सकेंगी. ऐसे में नई शिक्षा नीति के अनुरूप रांची विश्वविद्यालय का यह डिजिटल बदलाव उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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