Monday, November 2, 2026

देवघर में CJI सूर्यकांत ने किया विधिक सेवा शिविर का उद्घाटन, 1,880 लाभुकों के बीच बांटी गई 14.46 करोड़ रुपये की सहायता

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Deoghar News | 2 नवंबर 2026: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत सोमवार को देवघर पहुंचे, जहां उन्होंने सिविल कोर्ट परिसर में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) की ओर से आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर का उद्घाटन किया। इस दौरान विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के तहत चयनित लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों और सहायता का वितरण किया गया। कार्यक्रम में कुल 1,880 लाभुकों को योजनाओं का लाभ मिला, जिसके तहत 1,446.90 लाख रुपये की राशि वितरित की गई।

आम लोगों तक लाभ पहुंचाना ही न्याय की असली पहचान : CJI

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्याय का मतलब केवल अदालत तक पहुंचना नहीं है, बल्कि नागरिकों को उनके अधिकारों का वास्तविक लाभ मिलना भी है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी बुजुर्ग महिला को पेंशन मिलना, श्रमिक को उसकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक प्राप्त होना, बच्चे को शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलना और जरूरतमंद परिवार को समय पर सहायता उपलब्ध होना भी न्याय के महत्वपूर्ण स्वरूप हैं।

CJI ने विधिक सेवा संस्थाओं से अपील की कि वे जरूरतमंद लोगों तक खुद पहुंचें, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में विधिक जागरूकता पर जोर

मुख्य न्यायाधीश ने झारखंड की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के जनजातीय और दूरस्थ इलाकों में लोगों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना बेहद जरूरी है।

उन्होंने स्थानीय भाषाओं के माध्यम से विधिक जागरूकता अभियान चलाने और पारा विधिक स्वयंसेवकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनका जोर इस बात पर रहा कि कानूनी सहायता की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, ताकि जरूरतमंद लोग अपने अधिकारों से वंचित न रहें।

सैनिक परिवारों और विवादों के समाधान की योजनाओं का जिक्र

अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की ‘वीर परिवार सहायता योजना’ का भी उल्लेख किया। इस योजना का उद्देश्य सैनिकों और उनके परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है।

उन्होंने आपसी सहमति से लंबित विवादों का समाधान करने के लिए चलाए जा रहे ‘मीडिएशन फॉर द नेशन’ अभियान की भी चर्चा की। ऐसे प्रयासों से विवादों को बातचीत और मध्यस्थता के जरिए सुलझाने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा उन्होंने पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने, बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए संचालित ‘प्रोजेक्ट शिशु’ तथा सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को लगातार सहयोग देने पर भी जोर दिया।

पलामू और रांची में विधिक सहायता क्लीनिक का उद्घाटन

कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वर्चुअल माध्यम से दो विधिक सहायता क्लीनिकों का उद्घाटन किया। इनमें पलामू स्थित भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय और रांची स्थित सरला बिरला विश्वविद्यालय में स्थापित क्लीनिक शामिल हैं।

इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को कानूनी जानकारी और जरूरत के अनुसार विधिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

1,880 लाभुकों के बीच 14.46 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित

विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर के दौरान विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए चयनित पात्र लोगों को सहायता और परिसंपत्तियां प्रदान की गईं।

आयोजकों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कुल 1,880 लाभुकों के बीच 1,446.90 लाख रुपये, यानी लगभग 14.47 करोड़ रुपये, की राशि विभिन्न योजनाओं के तहत वितरित की गई। इस पहल का उद्देश्य पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और उन्हें सशक्त बनाना रहा।

सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश रहे मौजूद

इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, जो झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, तथा न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय सहित अन्य न्यायाधीश भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

शिविर के जरिए कानूनी जागरूकता, जरूरतमंदों को विधिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

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