Saturday, October 31, 2026

तिरहुत MLC चुनाव में हार के बाद NDA में सियासी बयानबाजी, देवेश ठाकुर के आरोपों पर BJP विधायक का पलटवार

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सीतामढ़ी | 31 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News

बिहार के तिरहुत स्नातक एमएलसी चुनाव में एनडीए प्रत्याशी अभिषेक झा की हार के बाद गठबंधन के भीतर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने कुछ गठबंधन नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए चुनाव के दौरान असहयोग का आरोप लगाया है। वहीं, रीगा से बीजेपी विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि एनडीए के सभी घटक दलों ने प्रत्याशी की जीत के लिए मिलकर प्रयास किया था।

इस बीच, अभिषेक झा की सोशल मीडिया पोस्ट ने भी राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है। उन्होंने अपनी तुलना महाभारत के अभिमन्यु से करते हुए सवाल उठाया कि क्या वह अपने ही राजनीतिक परिवार में चक्रव्यूह के बीच अकेले पड़ गए थे?

देवेश चंद्र ठाकुर ने गठबंधन के कुछ नेताओं पर उठाए सवाल

जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने चुनाव में अभिषेक झा की हार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन के कुछ नेताओं का रवैया चुनाव के दौरान साफ नहीं था। ठाकुर के मुताबिक, कुछ लोगों की उनसे व्यक्तिगत नाराजगी थी, लेकिन अभिषेक झा उनके साथ खड़े दिखाई दिए, इसलिए उन नेताओं ने अपनी नाराजगी का निशाना प्रत्याशी को बनाया।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिन लोगों ने पहले उनसे मदद ली थी, उनमें से कुछ ने चुनाव के दौरान विरोधी भूमिका निभाई। सांसद ने सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोगों को यह बात भी पसंद नहीं थी कि कमजोर समाज से आने वाला व्यक्ति राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बन रहा है।

देवेश ठाकुर ने कहा कि उन्होंने गठबंधन के खिलाफ कभी काम नहीं किया और न ही किसी से किसी प्रत्याशी के खिलाफ वोट करने को कहा।

बैद्यनाथ प्रसाद ने आरोपों को किया खारिज

देवेश चंद्र ठाकुर के बयान पर बीजेपी विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतने वरिष्ठ नेता की ओर से इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने एनडीए में भीतरघात के आरोपों को खारिज किया।

बैद्यनाथ प्रसाद का दावा है कि स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव में गठबंधन के सभी घटक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिलकर काम किया। उन्होंने अभिषेक झा के पिछले चुनाव और इस बार के वोटों की तुलना करते हुए कहा कि पहले उन्हें करीब 10 हजार वोट मिले थे, जबकि इस बार लगभग 20 हजार मत प्राप्त हुए हैं।

बीजेपी विधायक के अनुसार, वोटों में हुई बढ़ोतरी गठबंधन के कार्यकर्ताओं की मेहनत को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार के बाद भीतरघात का आरोप लगाना उचित नहीं है।

अभिषेक झा ने खुद को बताया महाभारत का अभिमन्यु

चुनावी नतीजे के बाद अभिषेक झा की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में है। उन्होंने चुनाव में समर्थन देने वाले मतदाताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार जताया। साथ ही महाभारत के अभिमन्यु प्रसंग का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या वह अपने ही राजनीतिक परिवार एनडीए के भीतर चक्रव्यूह में अकेले पड़ गए थे?

उनकी इस टिप्पणी को गठबंधन के भीतर अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की पीड़ा के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी नेता का नाम लेकर सीधे आरोप नहीं लगाया। अभिषेक झा ने कहा कि वह किसी के प्रति कटुता या द्वेष नहीं रखते और चुनाव के दौरान हुई घटनाओं तथा परिस्थितियों पर आत्ममंथन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, समय के साथ सच्चाई सामने आएगी।

4700 मतपत्र अमान्य होने का भी किया दावा

अभिषेक झा ने चुनाव परिणाम को लेकर करीब 4700 मतपत्रों के अमान्य किए जाने का दावा भी किया है। उनका कहना है कि इन मतपत्रों पर उनके नाम के सामने टिक का निशान लगा था, इसके बावजूद उन्हें अमान्य घोषित कर दिया गया।

अभिषेक झा के अनुसार, यदि इन मतपत्रों को वैध माना जाता तो चुनाव का परिणाम उनके पक्ष में भी जा सकता था। हालांकि, मतपत्रों की वैधता और इस दावे की पुष्टि के लिए निर्वाचन संबंधी आधिकारिक आंकड़ों तथा दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है।

चुनावी हार के बाद NDA के भीतर बढ़ी चर्चा

तिरहुत स्नातक एमएलसी चुनाव के नतीजे के बाद एनडीए के नेताओं के अलग-अलग बयान गठबंधन की अंदरूनी राजनीति को चर्चा में ले आए हैं। देवेश चंद्र ठाकुर ने कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि बैद्यनाथ प्रसाद ने गठबंधन की एकजुटता का दावा किया है।

दूसरी ओर, अभिषेक झा की अभिमन्यु और चक्रव्यूह वाली टिप्पणी ने विवाद को नया राजनीतिक संदर्भ दे दिया है। फिलहाल, चुनाव में कथित भीतरघात को लेकर नेताओं के आरोप और जवाब सामने हैं, लेकिन किसी भी तरह के असहयोग की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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