Tuesday, May 5, 2026

तंबाकू छोड़ने से भारत के 2.05 करोड़ परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी.

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तंबाकू छोड़ना केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी भारत के करोड़ों परिवारों के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो सकता है. हाल ही में ‘बीएमजे ग्लोबल हेल्थ’ (BMJ Global Health) जर्नल में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, यदि भारत के लोग तंबाकू का सेवन बंद कर दें, तो देश के लगभग 2.05 करोड़ (20.5 मिलियन) परिवार अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर एक उच्च वर्ग में शामिल हो सकते हैं.

यह शोध टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई और आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (NICPR), नोएडा के शोधकर्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है.

ग्रामीण और गरीब परिवारों पर सबसे बड़ा असर
इस अध्ययन में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि तंबाकू छोड़ने का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और सबसे गरीब परिवारों को होगा. आंकड़ों के अनुसार:

ग्रामीण भारत
लगभग 1.7 करोड़ (11.64%) ग्रामीण परिवार तंबाकू पर होने वाले खर्च को बचाकर अपनी आर्थिक श्रेणी को ऊपर ले जा सकते हैं.

शहरी भारत
शहरी क्षेत्रों में लगभग 35 लाख (7.26%) परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा.

सबसे गरीब तबका
विश्लेषण के अनुसार, सबसे गरीब परिवारों में से 12.4% यानी लगभग 56.2 लाख परिवार अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर सकते हैं. ये परिवार वर्तमान में अपनी आय का लगभग 6.4% से 6.6% हिस्सा बीड़ी, सिगरेट और गुटखे जैसे उत्पादों पर खर्च कर देते हैं.

मध्यम वर्ग के लिए भी बड़ी राहत
अध्ययन यह भी बताता है कि तंबाकू का सेवन बंद करने से केवल गरीबों को ही नहीं, बल्कि मध्यम वर्ग को भी फायदा होगा. लगभग 71 लाख मध्यम आय वाले परिवार तंबाकू पर होने वाले खर्च को बचाकर ‘अमीर’ या बेहतर आर्थिक श्रेणी में कदम रख सकते हैं.

गरीबी उन्मूलन की रणनीति के रूप में तंबाकू नियंत्रण
शोधकर्ताओं का तर्क है कि तंबाकू पर खर्च होने वाला पैसा सीधे तौर पर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य जैसे आवश्यक खर्चों में कटौती करता है. तंबाकू से होने वाली बीमारियों के इलाज और उसके कारण होने वाली अकाल मृत्यु से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का नुकसान होता है.

भारत जैसे देश में, जहां तंबाकू उपयोगकर्ताओं का एक बड़ा हिस्सा निम्न और मध्यम आय वर्ग से आता है, वहां तंबाकू नियंत्रण को केवल स्वास्थ्य के नजरिए से नहीं, बल्कि गरीबी कम करने की रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए. शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि सरकार को तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाकर, जागरूकता अभियान चलाकर और तंबाकू छोड़ने में मदद करने वाले कार्यक्रमों को मजबूत कर इस दिशा में काम करना चाहिए.

अध्ययन में यह भी स्वीकार किया गया है कि यह एक ‘ऑब्जर्वेशनल स्टडी’ है, यानी यह जरूरी नहीं कि तंबाकू पर बचा हुआ पूरा पैसा केवल जरूरी चीजों पर ही खर्च हो. हालांकि, यह स्पष्ट है कि तंबाकू का सेवन लाखों परिवारों की आर्थिक उन्नति के रास्ते में एक बड़ी बाधा है. तंबाकू छोड़ना न केवल जीवन बचाएगा, बल्कि करोड़ों भारतीयों को गरीबी के चक्र से बाहर निकालने में भी मदद करेगा.

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