Tuesday, September 15, 2026

झुमरी तिलैया नगर परिषद में 56 विकास कार्यों के टेंडर में प्रतिस्पर्धा की कमी पर सवाल उठ रहे हैं। सभी टेंडरों में केवल दो-दो बोलियां मिलीं।

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  • अनूप कुमार, कोडरमा। 56 टेंडर, 56 खेल! संयोग या सुनियोजित प्रयोग..? हर काम में दो ही बोली। एक में 10% ज्यादा तो दूसरी शेड्यूल रेट पर। झुमरी तिलैया नगर परिषद चुनाव पश्चात बोर्ड गठन के बाद पहली बार विकास कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर जारी करोड़ों के टेंडर में प्रतिस्पर्धा गायब होने से बड़े सवाल उठने लगे हैं। 
  • दरअसल झुमरी तिलैया नगर परिषद में करीब 4.40 करोड़ रुपये की 56 विकास योजनाओं की निविदा गत 25 मई को निकाली गई थी। 28 मई को खोले गए इन 56 टेंडरों में एक समान पैटर्न देखने को मिला। सभी योजनाओं में केवल दो-दो निविदाएं दाखिल की गईं। 

कार्य शेड्यूल रेट पर आवंटित होने की स्थिति बन गई

इनमें एक बोली प्राक्कलित राशि से 10 प्रतिशत अधिक तथा दूसरी शेड्यूल रेट पर थी। परिणामस्वरूप सभी कार्य शेड्यूल रेट पर आवंटित होने की स्थिति बन गई। यही तथ्य अब संयोग से अधिक सुनियोजित व्यवस्था की ओर इशारा करता दिखाई दे रहा है।

बताया जा रहा है कि निविदा प्रक्रिया में ठेकेदारों के बीच आपसी समझौता या ‘सेटिंग-गेटिंग’ का खेल हुआ है। क्योंकि टेंडर के तय मानदंडों के अनुसार यदि खुली और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होती तो प्रत्येक योजना में कई दावेदार सामने आते। 

300 से अधिक टेंडर प्रपत्र जमा हो सकते थे

अनुमान है कि कुल मिलाकर 300 से अधिक टेंडर प्रपत्र जमा हो सकते थे। इससे न केवल नगर परिषद को निविदा प्रपत्रों की बिक्री से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होता, बल्कि प्रतिस्पर्धी बोली के कारण कार्य 10 से 20 प्रतिशत तक कम दर पर भी आवंटित हो सकते थे। ऐसी स्थिति में सरकारी खजाने को लाखों रुपये की बचत संभव थी। 

सूत्रों के अनुसार निविदा शुल्क जमा करने के लिए जिले के विभिन्न बैंकों से झुमरी तिलैया नगर परिषद के नाम लगभग 300 बैंक ड्राफ्ट तैयार कराए गए थे। हालांकि इनमें से आधे से अधिक ड्राफ्ट बाद में रद करा दिए गए।

दरअसल पूर्व में ठेकेदारों ने प्रतिस्पर्धा में 30-35 प्रतिशत तक लेस में लेकर काम नहीं किया। एग्रीमेंट तक नहीं कराया। इससे शहर का विकास प्रभावित हुआ और कुछ मामले में कार्य की गुणवत्ता भी। इसलिए हमने ठेकेदारों से अपील की थी कि ऐसी स्थिति नहीं उत्पन्न होने दें। कार्य की गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। इसलिए आप लोग सहमति बना सकते हैं तो बना लें। जाहिर हैं इतना अधिक लेस में लेकर ठेकेदार कार्य की गुणवत्ता से समझौता करते हैं। अब इन्हीं में से कुछ लोग साजिश के तहत अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। पहले तो हम टेंडर ऑनलाइन कराने जा रहे थे। लेकिन स्थानीय ठेकेदारों के आग्रह पर ऑनलाइन करवाएं। इस यदि इस तरह का आरोप होगा तो आगे से ऑनलाइन टेंडर करवाएंगे।- रमेश हर्षधर, अध्यक्ष नगर परिषद, झुमरीतिलैया।

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