Sunday, October 25, 2026

झारखंड हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति-2016: फैक्ट फाइंडिंग कमीशन में सुनवाई पूरी, फैसले पर अभ्यर्थियों की नजर.

Share

रांची: झारखंड में वर्ष 2016 की हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहे वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन में सुनवाई पूरी हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर गठित इस कमीशन ने अभ्यर्थियों, राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) का पक्ष सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अभ्यर्थियों को कमीशन के निर्णय का इंतजार है।

कमीशन की अध्यक्षता झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस गौतम कुमार चौधरी कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया, मेरिट लिस्ट तैयार करने के तरीके और अधिक अंक मिलने के बावजूद नियुक्ति से वंचित रहने के अभ्यर्थियों के दावों पर चर्चा हुई।

1.18 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा, मेरिट लिस्ट पर सवाल

अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता, अमृतांश वत्स और रवि कुमार ने अंतिम बहस की। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।

अभ्यर्थियों के पक्ष की ओर से बताया गया कि परीक्षा में कुल 1,18,434 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जबकि केवल 48,981 अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट तैयार की गई। दलील दी गई कि इस प्रक्रिया के कारण कई अभ्यर्थी प्रभावित हुए और अधिक अंक प्राप्त करने वाले कुछ उम्मीदवार भी नियुक्ति से वंचित रह गए।

हालांकि, ये आंकड़े और अनियमितताओं से जुड़े दावे अभ्यर्थियों की ओर से पेश किए गए पक्ष का हिस्सा हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष कमीशन के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों ने उठाए चयन प्रक्रिया पर सवाल

सुनवाई के दौरान राज्यस्तरीय और जिलावार मेरिट लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। अभ्यर्थियों की ओर से दावा किया गया कि अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद सैकड़ों उम्मीदवारों को नियुक्ति का अवसर नहीं मिला।

कुछ ऐसे अभ्यर्थियों का मामला भी सामने रखा गया, जिनकी उम्मीदवारी पहले रद्द कर दी गई थी। बाद में उनकी उम्मीदवारी बहाल किए जाने, उन्हें सफल घोषित करने और नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से अनुशंसा किए जाने का उल्लेख किया गया।

अभ्यर्थियों ने इन मामलों के आधार पर चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों का ब्योरा पेश

सुनवाई के दौरान दो अगस्त 2022 के बाद नियुक्त हुए उम्मीदवारों की तुलना में अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद नियुक्ति नहीं पाने वाले अभ्यर्थियों का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत किया गया।

इससे पहले कमीशन ने अभ्यर्थियों से संबंधित जानकारियां टेबुलर चार्ट के रूप में उपलब्ध कराने को कहा था। राज्य सरकार और JSSC को भी अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए 24 अक्टूबर तक का समय दिया गया था।

अभ्यर्थियों के अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित अतिरिक्त विवरण और दस्तावेज कमीशन के समक्ष रखे गए। पिछली सुनवाई में JSSC की ओर से प्रस्तुत राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट पर कमीशन ने असंतुष्टि जताई थी और अतिरिक्त जानकारी की जरूरत बताई थी।

17,752 पदों पर शुरू हुई थी नियुक्ति प्रक्रिया

वर्ष 2016 में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से हाईस्कूल शिक्षकों के 17,752 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से करीब 10 हजार पदों पर ही नियुक्तियां हो सकीं, जबकि शेष पदों के रिक्त रहने की बात कही गई है। इस प्रक्रिया में जिलावार और राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट का इस्तेमाल किया गया था।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि मेरिट लिस्ट तैयार करने की अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण योग्य उम्मीदवारों को नुकसान हुआ। इसी विवाद के बीच नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमीशन का गठन किया गया।

फैसले का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कमीशन ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कमीशन नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर क्या निष्कर्ष देता है।

फिलहाल, कमीशन की ओर से अंतिम निर्णय की घोषणा की जानकारी उपलब्ध नहीं है। फैसले के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर क्या रुख सामने आता है और अभ्यर्थियों की मांगों पर आगे क्या कार्रवाई हो सकती है।

BHARAT SUPERFAST NEWS

Read more

Local News