रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स (RIMS) के डेंटल इंस्टीट्यूट में लेक्चरर पद पर नियुक्ति से जुड़े मामले में डॉ. अनुज शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने डॉ. शर्मा की उम्मीदवारी खारिज करने वाले RIMS के आदेश को अवैध और मनमाना बताते हुए निरस्त कर दिया।
अदालत ने RIMS को निर्देश दिया है कि डॉ. अनुज शर्मा को पीरियोडोंटोलॉजी एंड ओरल इंप्लांटोलॉजी विभाग में लेक्चरर के पद पर नियुक्त किया जाए। कोर्ट ने कहा है कि उनकी नियुक्ति डॉ. संतोष कुमार वर्मा की नियुक्ति की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी।
डॉ. वर्मा की नियुक्ति रहेगी बरकरार
अदालत ने करीब 10 वर्षों से कार्यरत डॉ. संतोष कुमार वर्मा की नियुक्ति को रद्द नहीं किया है। उन्हें वर्तमान पद पर काम करते रहने की अनुमति दी गई है। दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने RIMS को आवश्यकता के अनुसार डॉ. अनुज शर्मा के लिए नया लेक्चरर पद और संबंधित प्रमोशनल पद सृजित करने का निर्देश दिया है।
वरिष्ठता और अन्य लाभ का निर्देश
हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक डॉ. शर्मा को डॉ. वर्मा की नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही वेतनमान में आवश्यक संशोधन और डॉ. वर्मा को दिए गए प्रमोशन के अनुरूप परिणामी लाभ भी देने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि डॉ. शर्मा को पिछली अवधि का बकाया वेतन यानी बैक वेज नहीं मिलेगा। कोर्ट के अनुसार उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया था कि संबंधित अवधि के दौरान वे किसी अन्य लाभकारी रोजगार में नहीं थे।
आठ सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने RIMS को आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति से जुड़ी पूरी प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। यदि संस्थान में वर्तमान में पद उपलब्ध नहीं है, तो आवश्यकतानुसार लेक्चरर और प्रमोशनल पदों का सृजन करना होगा।
2015 के भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है मामला
यह मामला RIMS के विज्ञापन संख्या 7581 से संबंधित है, जो 7 नवंबर 2015 को जारी हुआ था। इसमें डेंटल इंस्टीट्यूट के विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। पीरियोडोंटोलॉजी एंड ओरल इंप्लांटोलॉजी विभाग में लेक्चरर पद के लिए संबंधित विषय में MDS डिग्री के साथ तीन वर्ष के ट्यूटर या सीनियर रेजिडेंट के तौर पर शिक्षण अनुभव निर्धारित किया गया था।
अभ्यर्थियों की उम्र और अनुभव की गणना 30 नवंबर 2015 तक की जानी थी। डॉ. अनुज शर्मा ने इस पद के लिए आवेदन किया था और 1 अप्रैल 2016 को साक्षात्कार में शामिल हुए थे। इसके बाद डॉ. संतोष कुमार वर्मा का चयन किया गया था। नियुक्ति से संबंधित इसी विवाद को लेकर डॉ. शर्मा ने हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत में पक्ष रखा।
