Tuesday, August 11, 2026

झारखंड में जल जीवन मिशन की 72% योजनाएं लंबित, CAG रिपोर्ट में कई अनियमितताओं का उल्लेख.

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रांची: झारखंड में जल जीवन मिशन की प्रगति को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई गंभीर बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में स्वीकृत करीब 98 हजार योजनाओं में से दिसंबर 2024 तक केवल 28 प्रतिशत योजनाएं ही पूरी हो सकीं। वहीं, बड़ी संख्या में योजनाएं दो साल से अधिक समय से लंबित पाई गईं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि योजना के लाभुकों में संतुष्टि का स्तर काफी कम रहा। सर्वेक्षण के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में केवल 19 से 40 प्रतिशत लाभुकों ने ही योजना के प्रति संतोष जताया। CAG ने योजना के क्रियान्वयन में गांवों के चयन और ठेकेदारों को भुगतान से जुड़ी कुछ अनियमितताओं का भी उल्लेख किया है।

98 हजार से अधिक योजनाएं स्वीकृत

CAG के ऑडिट के अनुसार, पांच वर्षों की अवधि में राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत 98,067 योजनाओं को मंजूरी दी थी। इनकी अनुमानित कुल लागत 24,360.91 करोड़ रुपये थी। हालांकि, दिसंबर 2024 तक इनमें से सिर्फ 27,294 योजनाएं पूरी हो पाई थीं।

इसका मतलब है कि स्वीकृत योजनाओं में लगभग 28 प्रतिशत ही निर्धारित अवधि में पूरी हुईं, जबकि करीब 72 प्रतिशत योजनाएं लंबित थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें कई योजनाएं दो वर्ष से ज्यादा समय से अधूरी पड़ी थीं।

छह जिलों में किया गया ऑडिट

जल जीवन मिशन की स्थिति की जांच के लिए CAG ने राज्य के छह जिलों को नमूने के तौर पर चुना। इनमें धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग, खूंटी, कोडरमा और पश्चिमी सिंहभूम शामिल थे।

ऑडिट के दौरान इन जिलों के पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों के रिकॉर्ड की जांच की गई। इसके अलावा 12 प्रखंडों और 26 गांवों से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई।

उपलब्ध राशि में से 11,468 करोड़ रुपये खर्च

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच जल जीवन मिशन के लिए केंद्र और राज्य के हिस्से के रूप में कुल 11,690.09 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे। इसमें बैंक से प्राप्त 53.04 करोड़ रुपये का ब्याज और अन्य स्रोतों से मिली 76.87 करोड़ रुपये की राशि भी शामिल थी।

इस उपलब्ध राशि में से सरकार ने 11,468.63 करोड़ रुपये खर्च किए।

नल से पानी पहुंचाने के लक्ष्य पर भी सवाल

जल जीवन मिशन की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी। उस समय झारखंड के ग्रामीण इलाकों में 52,27,214 घर दर्ज थे और इनमें से करीब सात प्रतिशत घरों में पहले से नल के जरिए पेयजल उपलब्ध था।

बाद में ग्रामीण परिवारों की संख्या बढ़ने के साथ नल से जलापूर्ति का लक्ष्य भी संशोधित किया गया। मार्च 2025 तक रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार 34.31 लाख घरों को नल जल सुविधा से जोड़ा गया था। यह निर्धारित लक्ष्य का करीब 55 प्रतिशत बताया गया है।

लाभुकों में संतुष्टि का स्तर कम

ऑडिट के दौरान योजना के लाभुकों से भी फीडबैक लिया गया। सर्वेक्षण में केवल 19 से 40 प्रतिशत लोगों ने जल जीवन मिशन की सेवाओं के प्रति संतुष्टि व्यक्त की। इससे संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में लाभुक योजना की उपलब्ध सुविधाओं से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे।

CAG ने यह भी पाया कि नियमों के मुताबिक जिन राजस्व गांवों को योजना में शामिल किया जाना था, उनमें से 3,339 गांवों को योजना के दायरे में नहीं लाया गया।

ठेकेदार को अतिरिक्त भुगतान का मामला

रिपोर्ट में ठेकेदारों को अनुचित वित्तीय लाभ दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। ऑडिट में कुल 27.13 करोड़ रुपये के ऐसे लाभ का मामला सामने आने की बात कही गई है।

चाईबासा प्रमंडल की जगन्नाथपुर जलापूर्ति योजना का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि यह परियोजना अप्रैल 2023 में शुरू हुई थी। इसकी अनुमानित लागत 118.60 करोड़ रुपये थी और इसे जुलाई 2025 तक पूरा किया जाना था।

योजना की शर्तों के मुताबिक DI पाइप की आपूर्ति और उसकी बिछाई पूरी होने के बाद ठेकेदार को 85 प्रतिशत भुगतान किया जाना था। हालांकि, ऑडिट में इस मामले में ठेकेदार को 100 प्रतिशत भुगतान किए जाने की बात सामने आई।

CAG की रिपोर्ट में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में सामने आई इन कमियों को दूर करने और योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

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